अफगानिस्तान का अफीम संकट बार फिर दुनिया के लिए खतरा
तालिबान के प्रतिबंध के बाद भी काम जारी
रोजगार या खेती का दूसरा साधन नहीं है
पूरी दुनिया को होती है यह से सप्लाई
काबुलः अफगानिस्तान में सत्ता में वापसी के पांच साल बाद, तालिबान अक्सर नशीली दवाओं के खिलाफ अपनी कथित सफलता का ढोल पीटता रहा है। कभी दुनिया का सबसे बड़ा अफीम उत्पादक रहे अफगानिस्तान पर वर्ष 2022 में तालिबान ने अफीम की खेती पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, यह तथाकथित सफलता अब तेजी से बिखरती नजर आ रही है।
वर्ष 2025 तक अफीम की खेती में 95 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन यह उपलब्धि बहुत कम समय में उलट रही है। संयुक्त राष्ट्र के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अफगानिस्तान में अफीम की खेती का क्षेत्रफल 10,000 हेक्टेयर से चौगुना से अधिक बढ़कर इस वर्ष 43,000 हेक्टेयर से अधिक हो गया है। केवल 2026 में ही अफगानिस्तान में अफीम की बिक्री से लगभग 52.5 करोड़ (525 मिलियन) अमेरिकी डॉलर की कमाई दर्ज की गई है।
संयुक्त राष्ट्र ने इस स्थिति का मुख्य कारण किसानों के लिए वैकल्पिक आजीविका के साधनों की भारी कमी को बताया है। अब कई अफगान किसान अपने बच्चों का पेट पालने के लिए मजबूर होकर फिर से अफीम की खेती की ओर रुख कर रहे हैं।
फसलों की बेहतर पैदावार के बावजूद, खेती की ऊंची लागत और अन्य फसलों की कम कीमतों ने गरीब किसानों की कमर तोड़ दी है, जिससे उनके लिए भोजन जुटाना भी मुश्किल हो गया है।
पर्यावेक्षकों का मानना है कि कृषि आय में आ रही इस गिरावट और इसके परिणामस्वरूप उपजी भुखमरी का बच्चों के स्वास्थ्य पर अत्यंत गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि इस वर्ष अफगानिस्तान के 34 में से 10 प्रांतों में बच्चों में कुपोषण का स्तर अत्यंत गंभीर और खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है। यह संख्या वर्ष 2027 तक बढ़कर 14 प्रांतों तक पहुंच सकती है।
हालांकि तालिबान का दावा है कि वास्तविक अफीम की खेती संयुक्त राष्ट्र के अनुमान से लगभग आधी है, फिर भी उसने स्वीकार किया है कि किसानों को वैकल्पिक आजीविका के साधन उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।
गौरतलब है कि सन 2000 में जब तालिबान ने पहली बार अफीम पर प्रतिबंध लगाया था, तो सत्ता से बेदखल होने के कारण एक साल बाद ही वह प्रतिबंध ध्वस्त हो गया था। यद्यपि वर्तमान प्रतिबंध के लंबे समय तक टिकने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन किसान पिछली पीढ़ी की तुलना में अधिक कठोर परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। लगातार आ रहे सूखे ने जल निकायों को सुखा दिया है और स्थिति को अत्यधिक विकट बना दिया है। परिणामस्वरूप, यह गहराता संकट वैश्विक हेरोइन व्यापार में अफगानिस्तान की भूमिका को पुनः जीवित करने का गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।