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सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने नई जानकारी पेश की

खुद ही अपना जालसाजी के पोल खोल रहा है

सारे फॉर्म सात जाली होने के दावा

आरोप है कि 32 ऐसे फॉर्म जमा हुए

पहले ही हो चुका है इसका भंडाफोड़

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग को उत्तर प्रदेश में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में फॉर्म 7 जमा किए जाने के आरोपों के संबंध में सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया। गौरतलब है कि फॉर्म 7 का उपयोग प्रारूप मतदाता सूची में शामिल किसी मतदाता का नाम हटाने के लिए किया जाता है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ उत्तर प्रदेश एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं में दायर एक आवेदन पर सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया (लोकसभा) और समाजवादी पार्टी के नेता अरविंद कुमार सिंह शामिल हैं। सुनवाई के दौरान आयोग के वरिष्ठ अधिवक्ता नामा शेषाद्रि नायडू ने अदालत को सूचित किया कि आरोपों की जांच के बाद इन फॉर्मों को फर्जी पाया गया और उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने मौके पर जाकर जांच की थी और किसी भी फर्जी फॉर्म को स्वीकार नहीं किया गया।

हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील ने न्यायिक जांच पर जोर देते हुए आरोप लगाया कि एक निर्वाचन क्षेत्र में एक विशेष समुदाय के खिलाफ 32 फॉर्म 7 जमा किए गए थे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में समय पर सुधारात्मक कदम न उठाए जाने के कारण अधिकारियों का दुस्साहस बढ़ा, जिससे कर्नाटक और तेलंगाना में भी ऐसी ही स्थिति पैदा हुई। अंततः, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से लंबित मुद्दों का ब्योरा निर्वाचन आयोग को सौंपने को कहा। अदालत ने निर्देश दिया कि विवरण प्राप्त होने पर आयोग तथ्यात्मक पहलुओं की जांच करे, आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करे। वहीं केरल और छत्तीसगढ़ में एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आयोग ने बताया कि प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिसके बाद सीजेआई ने टिप्पणी की कि छूट गए पात्र व्यक्तियों का नाम जोड़ने की प्रक्रिया जारी रखी जा सकती है।