मध्य एशिया में जारी युद्ध से उत्पन्न ऊर्जा संकट के बीच खबर
गहरे समुद्र में यह पाया गया है
कुआं से गैस का प्रवाह चालू हुआ
उच्चाधिकारियों ने वहां का दौरा किया
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में भारत को एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख तेल एवं गैस खोज कंपनी, ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) ने ओडिशा के तट के पास महानदी बेसिन के गहरे समुद्र (डीपवाटर) में प्राकृतिक गैस के एक नए भंडार की खोज की है। यह सफलता ओएनजीसी के मौजूदा डीपवाटर अभियान के तहत खोदे गए पहले ही कुएं में मिली है। वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की सप्लाई को लेकर चल रहे अनिश्चितता के दौर में घरेलू धरती पर इस खजाने का मिलना देश के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है।
यह महत्वपूर्ण अभियान देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के मकसद से शुरू किया गया है, जो सरकार की महत्वाकांक्षी समुद्र मंथन पहल के अनुरूप है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 25 जुलाई 2026 को इस डीपवाटर अन्वेषण अभियान का शुभारंभ किया था। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य भारत के समुद्री और गहरे जलीय क्षेत्रों में छिपे तेल व प्राकृतिक गैस के नए स्रोतों का पता लगाना है।
कंपनी के अनुसार, सब-सर्फेस डेटा के गहन विश्लेषण और मूल्यांकन के बाद, 18 सितंबर 2026 को एमबीडब्ल्यू-28 नामक कुएं की ड्रिलिंग का काम सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इसके तुरंत बाद इस कुएं से गैस का प्रवाह शुरू हो गया। शुरुआती तकनीकी आंकड़ों से संकेत मिलता है कि कुएं में गैस का दबाव (रिजर्वायर प्रेशर) काफी मजबूत है और उत्पादन की दर भी बेहद संतोषजनक है। इस खोज से महानदी बेसिन के गहरे पानी वाले इलाकों में हाइड्रोकार्बन की संभावनाओं के द्वार और अधिक खुल गए हैं।
इस बड़ी सफलता के बाद ओएनजीसी के शीर्ष नेतृत्व ने भी उत्साह दिखाया। कंपनी के चेयरमैन अरुण कुमार सिंह, तकनीकी एवं क्षेत्र सेवाओं के निदेशक विक्रम सिंह और खोज निदेशक ओपी सिन्हा ने ड्रिलशिप का दौरा किया और वहां तैनात क्रू व तकनीकी टीम से मुलाकात कर उनकी हौसलाफजाई की।
चूंकि भारत अपनी कुल ऊर्जा और ईंधन की जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए घरेलू स्तर पर हाइड्रोकार्बन की खोज बेहद अहम हो जाती है। ओएनजीसी ने घोषणा की है कि वह आने वाले समय में देश की ऊर्जा जरूरतों को मजबूती देने के लिए डीपवाटर और अल्ट्रा-डीपवाटर क्षेत्रों में अपनी खोजबीन को और तेज करेगा। इस नई खोज को भारत के एनर्जी सेक्टर में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।