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स्वतंत्र भारद्वाज की जमानत के बाद अदालत की अग्निपरीक्षा

उमर खालिद और शरजील मामले में तीस को सुनवाई

एएसजी आज बीमार बताये गये हैं

पहले भी कई बार नामंजूर हो गयी

निचली अदालत ने खारिज की याचिका

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः दिल्ली उच्च न्यायालय 30 सितंबर को वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े बड़े साजिश मामले में पूर्व जेएनयू छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम द्वारा दायर जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। यह मामला गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है। इतने दिनों तक जेल में  बंद होने के बाद भी दिल्ली पुलिस इस मामले में जांच प्रारंभ नहीं कर पायी है। दूसरी तरफ जंतर मंतर पर हिंसा के आरोप में गिरफ्तार हिंदुवादी युवक स्वतंत्र भारद्वाज को अदालत ने चंद दिनों के अस्थायी जमानत पर रिहा कर दिया है।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति दिनेश भट्ट की एक खंडपीठ ने अभियोजन पक्ष के अनुरोध पर इस मामले की सुनवाई को टाल दिया। विशेष लोक अभियोजक ने यह कहते हुए स्थगन का अनुरोध किया था कि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू की तबीयत ठीक नहीं है, जिन्हें इस मामले में पैरवी करनी है। इसके अलावा, अदालत ने पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन की जमानत अपील को भी 4 नवंबर के लिए सूचीबद्ध किया है।

उमर खालिद ने अपनी तीसरी जमानत याचिका खारिज किए जाने को चुनौती दी है, जबकि शरजील इमाम ने भी उसी आदेश के खिलाफ जमानत न मिलने पर उच्च न्यायालय का रुख किया है। ये अपीलें राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण अधिनियम की धारा 21 के तहत निचली अदालत के 4 जुलाई के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई हैं, जिसमें खालिद और इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।

निचली अदालत ने कहा था कि उसके पास सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का पालन करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है जिसमें दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। अदालत ने उल्लेख किया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सुरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने पर या उक्त आदेश की तारीख से एक साल बीत जाने पर, जो भी पहले हो, इमाम को अपनी जमानत की गुहार फिर से लगाने की छूट होगी।

5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने गुलफिशा फातिमा, मीरा हैदर, शिफा-ऊर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी थी, हालांकि उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल इस मामले की जांच कर रही है और इसे भारतीय दंड संहिता तथा UAPA के तहत दर्ज किया गया है।