गरीबों के सब्सिडी वाले चावल में भी मुनाफाखोरी
व्यापारियों के बेचकर मुनाफा कमाया
अफसरों ने कमिशनखोरी की है इसमें
यहां के गरीबों को मिलना था यह चावल
भूपेन गोस्वामी
गुवाहाटीः गरीब मजदूरों के लिए बने रियायती चावल को नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल एग्रीकल्चरल मार्केटिंग कॉर्पोरेशन के जरिए व्यापारियों को डायवर्ट करने की धांधली में सीबीआई ने भारतीय खाद्य निगम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। सीबीआई ने एफसीआई और निरामैक के वरिष्ठ अधिकारियों को नामजद करते हुए कई अनियमितताओं का आरोप लगाया है, जिनमें नीति का उल्लंघन, अधिकारियों पर दबाव, चावल का व्यापारियों को हस्तांतरण और जनता को वितरण दिखाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करना शामिल है। इससे एफसीआई को 28 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। सीबीआई का आरोप है कि एनईआरएएमएसी के अतिरिक्त महाप्रबंधक ने ओपन मार्केट सेल स्कीम 2025-26 के तहत बिना ई-ऑक्शन में भाग लिए दिल्ली के दैनिक वेतनभोगियों, प्रवासी मजदूरों और बिना राशन कार्ड वालों के लिए 31,000 मीट्रिक टन चावल प्रति सप्ताह आबंटित करने का अनुरोध किया था।
जांच में सामने आया कि संस्था ने इस चावल को जरूरतमंदों तक पहुंचाने के बजाय तीन निजी संस्थाओं के साथ एमओयू करके इसे व्यापारियों को उठाने की सुविधा दी। निरामैक अधिकारियों ने झूठा दावा किया कि वे चावल प्राप्त करने के लिए अधिकृत हैं, जबकि 2025-26 की नीति के अनुसार केवल राज्य सरकारें और उनके निगम ही बिना ई-ऑक्शन के रियायती चावल पाने के पात्र थे।
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने पाया कि एफसीआई दिल्ली ने 13 अप्रैल से 15 मई के बीच निरामैक को लगभग 62,000 मीट्रिक टन चावल आबंटित किया। यह चावल 23,200 रुपया प्रति मीट्रिक टन की रियायती दर पर दिया गया, जबकि बाजार मूल्य 26,900 रुपया था, जिससे सरकारी खजाने को 28.49 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ। निजी कंपनियों ने व्यापारियों से पैसा जमा करवाकर 0.64 से 2.50 प्रति किलो तक कमीशन कमाया और चावल को आगे खुले बाजार में मुनाफे पर बेच दिया। इसे छिपाने के लिए फर्जी वितरण रिकॉर्ड और बैकडेटेड दस्तावेज तैयार किए गए। सीबीआई ने इसे आपराधिक साजिश करार दिया है।