हिमाचल में नैरोगेज रेलसेवा फिर से बाधित, दस ट्रेने रद्द
चंडीगढ़ः हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण सोलन जिले में शिमला-कालका नैरोगेज रेलवे लाइन (यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल) के नीचे से मिट्टी बह जाने के कारण पटरियां हवा में लटक गईं। इस घटना के बाद रविवार, 30 अगस्त को इस मार्ग पर चलने वाली 10 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया।
उत्तरी रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, शनिवार रात कोटी और गुम्मन स्टेशनों के बीच ब्रिज नंबर 57 के पास पहाड़ी खिसकने (हिल स्लिप) से पटरी का आधार पूरी तरह धंस गया, जिससे रेल ढांचा असुरक्षित हो गया। घटना के बाद रेलवे ने त्वरित और निर्बाध बचाव अभियान चलाते हुए 400 से अधिक यात्रियों और रेल कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला। शिमला रेलवे स्टेशन अधीक्षक संजय गेवर ने बताया कि पटरियों की मरम्मत और मार्ग सुरक्षित होने के बाद ही ट्रेनों की आवाजाही फिर से शुरू करने पर विचार किया जाएगा।
इस मानसून के दौरान बारिश और भूस्खलन की वजह से 96 किलोमीटर लंबी इस धरोहर रेल लाइन पर ट्रेन संचालन कई बार प्रभावित हुआ है। 102 सुरंगों, 800 पुलों और 919 मोड़ों वाले इस ऐतिहासिक और दुर्गम मार्ग पर पर्यटकों की भारी भीड़ रहती है, लेकिन रविवार को स्टेशन पर सन्नाटा पसरा रहा।
दूसरी ओर, पूरे राज्य में बारिश का कहर जारी है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, रविवार शाम तक राज्य भर में 64 सड़कें यातायात के लिए बंद रहीं, जिनमें सबसे अधिक मंडी जिले में 24 सड़कें बंद हैं। मौसम केंद्र शिमला ने 3 सितंबर तक छिटपुट स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। 30 जून को मानसून के आगमन के बाद से राज्य में बारिश से जुड़ी घटनाओं में लगभग 104 लोगों की जान जा चुकी है और 1,184 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ है।