कुशीनगर में गंडक से कुल तेरह शव बरामद हुए
राष्ट्रीय खबर
लखनऊः पड़ोसी देश नेपाल में प्राकृतिक आपदा के चलते स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। देश के विभिन्न हिस्सों में आई विनाशकारी बाढ़ और मलबे के कारण जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस त्रासदी में मौतों का कुल आंकड़ा बढ़कर 788 तक पहुंच चुका है, जबकि 2,500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं।
इस भीषण प्राकृतिक आपदा का असर अब भारतीय सीमावर्ती क्षेत्रों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले से होकर गुजरने वाली गंडक नदी के तेज बहाव में नेपाल से बहकर आए शव मिलने का सिलसिला जारी है। कुशीनगर में पिछले चार दिनों के भीतर नदी से कुल 13 शव बरामद किए जा चुके हैं। रविवार को राज्य आपदा मोचन बल की टीम ने छितौनी तटबंध के भेडियारी ठोकर नंबर 3 के समीप जलस्तर पर गश्त के दौरान चार शव (दो महिलाएं और दो पुरुष) बरामद किए। इससे पूर्व शनिवार को भी तीन शव तैरते हुए पाए गए थे।
बरामद शवों की संख्या अधिक होने और कुशीनगर स्थानीय शवगृह (मोर्चरी) के पूरी तरह भर जाने के कारण नए शवों को सुरक्षित रखने हेतु गोरखपुर भेजा जा रहा है। खड्डा थाना प्रभारी संदीप कुमार सिंह ने जानकारी दी कि सभी आवश्यक कानूनी और चिकित्सीय औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शवों को मोर्चरी में रखवाया गया है तथा पहचान प्रक्रिया हेतु नेपाल प्रशासन को सूचित कर दिया गया है। फिलहाल किसी भी शव की शिनाख्त नहीं हो पाई है।
उल्लेखनीय है कि इस तबाही की शुरुआत 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट एक ग्लेशियर (हिमनद) फटने के कारण हुई थी। ग्लेशियर टूटने से आए भीषण हिम-चट्टान भूस्खलन के बाद पानी, कीचड़ और मलबे के सैलाब ने भोटेकोशी नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में प्रचंड रूप धारण कर लिया। इस जलप्रलय ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई शहरों, गांवों, बुनियादी ढांचों और प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं को पूरी तरह से तबाह कर दिया।
भारतीय विदेश मंत्रालय स्थिति पर निरंतर नजर बनाए हुए है। मंत्रालय के अनुसार, इस आपदा में 275 से अधिक भारतीय नागरिक और 128 भारतीय मूल के लोग लापता या संपर्क से बाहर हैं। हालांकि, राहत एवं बचाव अभियानों के बीच रविवार को विदेश मंत्रालय ने सुरक्षित निकाले गए 149 लोगों की सूची भी आधिकारिक रूप से साझा की है।