दो नदियों और ग्लेशियर ने खत्म कर दी कई बस्तियां
ग्लेशियर का हिस्सा झील में गिरा था
वहां से जल प्रलय की शुरुआत हो गयी
अनेक गांव पूरी तरह लापता ही हो गये हैं
राष्ट्रीय खबर
काठमांडूः भोटे कोशी और त्रिशूली—इन दो नदियों के रास्ते में आने वाले गांवों और कस्बों से जब पानी का तेज सैलाब टकराया, तो वह नेपाल में घरों, सड़कों, पुलों और बिजली संयंत्रों को अपने साथ बहा ले गया। विशेषज्ञों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि नदी में बना हुआ रुकावट वाला क्षेत्र (ब्लॉकेज) एक और अतिरिक्त बाढ़ का कारण बन सकता है। नेपाल और तिब्बत में अचानक आई भीषण बाढ़ के कारण कम से कम 176 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटकों सहित सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं।
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वैज्ञानिकों के मुताबिक हिमालय से एक बड़े ग्लेशियर का टुकड़ा फिसलकर नीचे गिरा। इससे वहां की ग्लेशियर झील में विस्फोट हुआ। उसके बाद से ग्लेशियर झील का पानी तेजी से नीचे की तरफ बहता गया और अपने साथ मलबे लेता हुआ एक पानी बम की तरह तबाही मचाता गया। यह घातक बाढ़ चीन और नेपाल के बीच बहने वाली ल्हेंदे नदी के तटबंधों से मिट्टी और मलबे का एक विशाल टुकड़ा टूटने के कारण आई। भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों के मार्ग में आने वाले गांवों और कस्बों से टकराया, जिससे नेपाल में घर, सड़कें, पुल और पावर प्लांट बह गए। सीमा के दोनों ओर के अधिकारियों ने बड़े पैमाने पर जनहानि की आशंका जताई है, जबकि भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार के जिलों में बाढ़ का अलर्ट जारी किया गया है।
नेपाल में बचाव अभियान के दौरान ली गई हवाई फुटेज में बाढ़ का भयानक मंजर दिखाई दे रहा है, जिसने अपने पीछे केवल गांवों के कीचड़ से सने कंकाल ही छोड़े हैं। नेपाली सेना लगातार उड़ानें भरकर दर्जनों लोगों को बचा रही है, जबकि खतरे वाले क्षेत्रों में नदी के पास रहने वाले अन्य लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है।
नेपाल पुलिस द्वारा साझा की गई तस्वीरों में बाढ़ का पानी नदी के माध्यम से उफान मारता और अपने रास्ते में आने वाले घरों को बहाकर ले जाता दिख रहा है, जबकि समाचार एजेंसी एएफपी द्वारा जारी तस्वीरों में कीचड़ भरी मिट्टी से एक घर की ऊपरी मंजिल बाहर निकलती दिखाई दे रही है। जून से सितंबर तक होने वाली मानसून की बारिश नियमित रूप से पूरे दक्षिण एशिया में घातक बाढ़ और भूस्खलन का कारण बनती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन इस क्षेत्र में चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता को बढ़ा रहा है।
काठमांडू स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट में जलवायु और पर्यावरण जोखिम के प्रमुख क्यांगोंग झांग ने दूसरी बाढ़ की आशंका के प्रति आगाह किया है। उन्होंने बताया, नेपाल-चीन सीमा नदी पर ऊपरी प्रवाह में अभी भी रुकावट बनी हुई है, ऐसे में अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि दूसरी बाढ़ आ सकती है।
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