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राहुल के सक्रिय होते ही महाराष्ट्र सरकार ने बदल लिया पैंतरा

 

आदिवासी छात्रावासों में 30 वर्ष की आयु सीमा समाप्त

तेरह दिनों से आंदोलन कर रहे थे छात्र

राहुल का बयान आया तो सरकार सक्रिय

विभागीय मंत्री ने खुद सुधार की बात कही

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः महाराष्ट्र सरकार ने आदिवासी छात्रावासों में प्रवेश से जुड़े विवादित नियमों पर बड़ा कदम उठाते हुए 14 अगस्त को जारी शासन निर्णय (गवर्नमेंट डिसीजन) पर रोक लगा दी है। सरकार ने नए नियमों में तय की गई 30 वर्ष की ऊपरी आयु सीमा को पूरी तरह समाप्त करने की घोषणा की है। पुणे में आदिवासी छात्रों द्वारा लगातार 13 दिनों तक किए गए उग्र विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक दबाव के बाद 25 अगस्त को राज्य शासन को यह फैसला वापस लेना पड़ा। राज्य सरकार ने 14 अगस्त को एक शासन निर्णय जारी कर आदिवासी छात्रावासों के संचालन, सुविधाओं और प्रवेश नियमों में संशोधन किया था। इस नए नियम में प्रवेश के लिए 30 साल की अधिकतम उम्र सीमा तय कर दी गई थी। इसके अलावा, लंबी छुट्टी से लौटने वाली छात्राओं का माहवारी (पीरियड्स) रजिस्टर बनाए रखने और कथित तौर पर प्रेगनेंसी टेस्ट (गर्भावस्था जांच) कराए जाने की शर्तों की बात सामने आई। इन अपमानजनक और सख्त नियमों के कारण आदिवासी छात्रों में भारी आक्रोश फैल गया।

विवादित शासन निर्णय के खिलाफ पुणे में आदिवासी छात्रों ने मोर्चा खोल दिया। छात्रावास की बुनियादी सुविधाओं में सुधार, पारदर्शी प्रवेश प्रक्रिया और छात्राओं के लिए लागू अपमानजनक शर्तों को तुरंत खत्म करने की मांगों को लेकर छात्र 13 दिनों तक सड़कों पर डटे रहे। छात्रों के उग्र विरोध प्रदर्शन के कारण शासन पर निर्णय बदलने का भारी दबाव बन गया था।

इस संवेदनशील मुद्दे ने राजनीतिक रूप भी ले लिया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आदिवासी छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए इस मामले में सीधे हस्तक्षेप किया। उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से फोन पर वार्ता की और छात्रों की चिंताओं को दूर करने तथा विवादित आदेश को रद्द करने का आग्रह किया।

14 अगस्त को राज्य सरकार ने छात्रावासों के लिए नए नियम लागू किए, जिसमें 30 वर्ष की आयु सीमा और छात्राओं से जुड़ी विवादित शर्तें शामिल थीं। 15 – 24 अगस्त तक पुणे में आदिवासी छात्रों का 13 दिवसीय आंदोलन जारी रहा; बुनियादी सुविधाओं और पारदर्शिता की मांगें जोर पकड़ती गईं। 24-25 अगस्त को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बात कर छात्रों के हित में फैसला लेने को कहा। आदिवासी विकास मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 14 अगस्त के फैसले पर रोक लगाने और आयु सीमा हटाने का ऐलान किया। 25 अगस्त को आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस (पत्रकार वार्ता) बुलाकर शासन निर्णय को स्थगित करने की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार छात्रों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। हमने इस मुद्दे पर विस्तृत विचार-विमर्श करने के बाद प्रवेश के लिए किसी भी तरह की आयु सीमा न थोपने का निर्णय लिया है। शासन के इस फैसले के बाद आंदोलनकारी छात्रों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, छात्रों का कहना है कि वे छात्रावासों में मूलभूत सुविधाओं की बहाली और पारदर्शी प्रक्रियाओं के पूरी तरह लागू होने तक निगरानी बनाए रखेंगे।