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अमेरिका के संभावित टैरिफ खतरे से भारतीय निर्यातक चिंता में

भारत के साथ रिश्ते बिगड़ने की आशंका भी

ट्रंप के हस्ताक्षर होते ही लागू होगा

अमेरिकी कांग्रेस ने इसे पारित किया

ईरान युद्ध की वजह से तेल संकट जारी

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: व्यापार विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम के तहत भारतीय निर्यात पर संभावित नए शुल्कों के प्रभाव का आकलन तभी किया जा सकता है, जब वाशिंगटन द्वारा वास्तविक शुल्कों, प्रभावित उत्पादों के दायरे और इसके लागू होने की समय-सारणी की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।

बुधवार को अमेरिकी कांग्रेस ने इस अधिनियम को पारित कर दिया, जिसके तहत रूस के कच्चे तेल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ भारत, चीन और रूसी ऊर्जा के अन्य प्रमुख खरीदार देशों पर 100 प्रतिशत तक का भारी आयात शुल्क लगाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। अब इस विधेयक को अंतिम स्वीकृति के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेजा गया है।

दूसरी तरफ भारतीय रुख भी स्पष्ट होता जा रहा है कि वह रूसी तेल के मुद्दे पर फिलहाल किसी समझौते के पक्ष में नहीं है। ईरान युद्ध की वजह से ईंधन की आपूर्ति में आयी बाधा की वजह से वह रूस के साथ अपने व्यापारिक संबंध जारी रखना चाहता है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि वाशिंगटन इस नए कानून का इस्तेमाल भारत के साथ एकतरफा व्यापार समझौता थोपने के लिए एक हथियार के रूप में कर सकता है। इसके अलावा, यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया की तरह भारत के खिलाफ भी धारा 301 या अन्य व्यापार कानूनों के तहत भविष्य में कार्रवाई की जा सकती है। भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, यह चिंता का विषय है क्योंकि इससे व्यापार अनिश्चितता बढ़ती है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे उन उत्पादों की व्यावसायिक व्यवहार्यता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं, जो 100% शुल्क के दायरे में आ सकते हैं। निर्यातकों का कहना है कि यदि वास्तव में ये शुल्क लगाए जाते हैं, तो कुछ शिपमेंट की अग्रिम लोडिंग की जा सकती है।

एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि स्थिति पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। टीटी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संजय के. जैन ने कहा कि इस कानून से वाशिंगटन को शुल्क लगाने की विधायी ताकत और बढ़त मिल जाती है। उन्होंने कहा, हालांकि, अमेरिका स्वयं उच्च मुद्रास्फीति का सामना कर रहा है, और इस तरह का कोई भी कदम अनिश्चितता पैदा करने के साथ-साथ आग में घी डालने का काम करेगा। थिंक-टैंक जीटीआरआई ने चेतावनी दी है कि अमेरिका अब भारत को 100 फीसद तक टैरिफ की धमकी देगा और अंत में कम दर की पेशकश कर सकता है, यदि नई दिल्ली रूसी तेल की खरीद कम करती है और एक बेहद असमान द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत रियायतें स्वीकार करती है।