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टीएमसी में बागियों की घर वापसी: अमदंगा विधायक कासिम सिद्दीकी लौटे ममता खेमे में, बोले- ‘दीदी के नाम पर हुआ था छल’

कोलकाता (पश्चिम बंगाल): तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी नेताओं की पार्टी में वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है। इसमें पहला प्रमुख नाम नॉर्थ 24 परगना के अमदंगा विधानसभा क्षेत्र से विधायक कासिम सिद्दीकी का है।

कासिम सिद्दीकी कुछ माह पूर्व बगावती रुख अपनाते हुए विपक्षी नेता ऋतब्रत बनर्जी के गुट में शामिल हो गए थे। अब उन्होंने औपचारिक रूप से ममता बनर्जी के खेमे में लौटने की घोषणा कर दी है। कासिम ने स्पष्ट किया कि वे हमेशा ममता बनर्जी (दीदी) के साथ थे और आगे भी रहेंगे, साथ ही आरोप लगाया कि दूसरे गुट में उन्हें धोखे में रखकर शामिल कराया गया था।

🗣️ ‘दीदी के नाम पर कराया गया था साइन’: कासिम सिद्दीकी का बड़ा दावा

ऋतब्रत गुट छोड़ने के कारणों का ब्योरा:

  • भ्रम में रखने का आरोप: विधायक कासिम सिद्दीकी ने बताया कि उन्हें यह कहकर गुट में शामिल किया गया था कि पूरा नेतृत्व ममता बनर्जी के मार्गदर्शन में चलेगा, लेकिन वहां पहुंचकर देखा कि संगठन की गतिविधियों में ‘दीदी’ का कोई स्थान नहीं था।

  • कागजातों पर हस्ताक्षर: कासिम के अनुसार, उनसे कुछ दस्तावेजों पर यह कहकर दस्तखत कराए गए थे कि ये सीधे ममता बनर्जी तक पहुंचाए जाएंगे।

  • ममता बनर्जी पर आस्था: कासिम ने कहा कि वे केवल ममता बनर्जी के नेतृत्व को पहचानते हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि दीदी ने ही उन्हें पार्टी का टिकट देकर विधानसभा भेजा था और जनता ने भी ममता बनर्जी का चेहरा देखकर ही उन्हें वोट दिया था।

🕌 फुरफुरा शरीफ से नाता और राजनीतिक पृष्ठभूमि

कासिम सिद्दीकी का राजनीतिक प्रोफाइल:

  • पीरजादा पहचान: कासिम सिद्दीकी को ‘पीरजादा’ के नाम से भी जाना जाता है। वे हुगली जिले की ऐतिहासिक फुरफुरा शरीफ दरगाह से ताल्लुक रखते हैं और राज्य के मुस्लिम समुदाय के कई वर्गों में उनका खासा प्रभाव है।

  • पार्टी महासचिव से विधायक तक: वे पिछले वर्ष औपचारिक रूप से टीएमसी में शामिल हुए थे, जिसके बाद पार्टी ने उन्हें महासचिव का दायित्व दिया और अमदंगा विधानसभा सीट से मैदान में उतारकर जीत सुनिश्चित कराई।

  • विधानसभा में समीकरण: उनकी यह घर वापसी ऐसे समय में हुई है जब राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेतृत्व और टीएमसी के आंतरिक समीकरणों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज है।

🗳️ बागी गुट की फ्लोर टेस्ट की मांग, कुणाल घोष बोले—’सीक्रेट बैलेट से हो मतदान’

विधानसभा में फ्लोर टेस्ट पर घमासान:

  • स्पीकर के फैसले को चुनौती: बागी गुट ने इस पूरे मामले में विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के निर्णय को चुनौती देते हुए शक्ति परीक्षण (फ्लोर टेस्ट) की मांग उठाई है।

  • टीएमसी का पलटवार: टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कहा कि स्पीकर का निर्णय अंतरिम व्यवस्था थी। पार्टी फ्लोर टेस्ट की हर चुनौती स्वीकार करने को तैयार है, बशर्ते मतदान गुप्त मतपत्र (सीक्रेट बैलेट) के जरिए कराया जाए।

  • पार्टी तोड़ने का आरोप: घोष ने आरोप लगाया कि बागी गुट अन्य ताकतों के कथित समर्थन से टीएमसी को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है, लेकिन पार्टी एकजुट होकर इसका सामना करेगी।