विपक्ष ने बयान में आनाकानी पर विरोध जताया
कोई शर्त नहीं मानेंगे सिर्फ बयान दें
घटना की जिम्मेदारी कोई तो लेगा
सरकार की दलील पूरी चर्चा होगी
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः संसद के मानसून सत्र के समाप्त होने में अब केवल दो दिन बचे हैं, जो कि हंगामे की भेंट चढ़ चुका है। ऐसे में सरकार छात्र विरोध प्रदर्शनों, राम मंदिर दान मामले और विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम पर विपक्ष के साथ चल रहे गतिरोध को खत्म करने के लिए उत्सुक है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के जवाब के लिए कुछ शर्तें तय की हैं, जिसमें विपक्षी दलों द्वारा शासित पंजाब और झारखंड में हुए आंदोलन को भी शामिल करने की बात कही गई है।
इसके अलावा, सरकार ने विपक्ष को यह स्पष्ट कर दिया है कि अमित शाह के जवाब देने से पहले इस मुद्दे पर विधिवत चर्चा होनी चाहिए। सरकारी सूत्रों ने कहा है कि केवल बयान जारी करना महज एक औपचारिकता होगी; हम सिर्फ एक बयान नहीं बल्कि पूरी और सार्थक चर्चा चाहते हैं। 20 जुलाई को संसद चलो मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई से मध्य दिल्ली की रफ्तार थमने के बाद से संसद की कार्यवाही लगभग ठप रही है। परीक्षा पेपर लीक को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व वाले प्रदर्शनकारियों के इस संघर्ष में कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।
यद्यपि 30 जुलाई को प्रधान ने इस्तीफा दे दिया, लेकिन कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने छात्रों पर कथित पुलिस ज्यादती के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शन और तेज कर दिया। बाद में ऐसे वीडियो और तस्वीरें सामने आईं जिनमें प्रदर्शनकारियों को छर्रे के घाव थे। तब से विपक्ष अड़ा हुआ है कि जब तक गृह मंत्री पुलिस कार्रवाई पर बयान नहीं देते, संसद का यह गतिरोध जारी रहेगा।
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने विशेष रूप से गृह मंत्री से यह बताने की मांग की है कि 20 जुलाई को छात्रों पर गोलीबारी का आदेश किसने दिया था। सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल ने कहा कि वह किसी भी तरह की काल्पनिक बातचीत में दिलचस्पी नहीं रखते हैं। उन्होंने कहा, सवाल कभी यह नहीं था कि अमित शाह आकर संसद में भाषण देंगे। सवाल हमेशा यह रहा है कि अमित शाह को यह स्पष्ट करना होगा कि दिल्ली में गोलीबारी का आदेश किसने दिया था।
राहुल गांधी ने प्रभावित छात्रों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की भी मांग की है और अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान की चोरी पर जवाबदेही की मांग उठाई है। कांग्रेस सांसद ने इन तीनों मांगों को संसद के गतिरोध को तोड़ने के लिए अनिगोशिएबल (जिन पर समझौता न हो सके) करार दिया है। सूत्रों का कहना है कि सरकार राम मंदिर में दान के गबन पर चर्चा की राहुल की मांग को मानने के लिए भी तैयार है। हालांकि, इस पर कोई भी चर्चा अन्य मुद्दों पर बहस के बाद ही होगी। भाजपा के लिए यह विवाद राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील है, जिसने राम मंदिर के निर्माण को अपनी राजनीतिक और वैचारिक कथा के केंद्र में रखा है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अब से कुछ ही महीने दूर हैं।