Breaking News in Hindi

रैपिड एक्शन फोर्स ने अपनी तरफ से सफाई दी

मामला पेचिदा हुआ तो सभी अपनी पीठ बचाने में जुट गये

पैलेट गन से घायल हुए हैं लोग

एक युवक की आंख चली गयी है

बिजली के झटके भी लगे हैं लोगों को

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः कॉकरोच जनता पार्टी के 20 जुलाई के संसद चलो मार्च के दौरान अपनाई गई भीड़ नियंत्रण रणनीति पर रैपिड एक्शन फोर्स  ने खुद सवाल उठाए हैं। आरएएफ की महानिरीक्षक सीमा धुंधिया ने स्वीकार किया कि प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग का जो क्रम (फोर्स ग्रेडिएंट) अपनाया गया, वह निर्धारित मानकों और आरएएफ के प्रशिक्षण के अनुरूप नहीं था। आंतरिक समीक्षा में तीन प्रदर्शनकारियों को पेलेट गन की चोटें लगने जैसी गंभीर परिचालन खामियां सामने आने के बाद यह रुख अपनाया गया है।

पुलिसिंग के संदर्भ में फोर्स ग्रेडिएंट का अर्थ स्थिति की गंभीरता के अनुसार चरणबद्ध तरीके से बल प्रयोग करने से है। 22 जुलाई को दिल्ली में तैनात कंपनी कमांडरों और कमांडेंटों के साथ समीक्षा बैठक करते हुए आईजी सीमा धुंधिया ने भविष्य के लिए कई सुधारात्मक निर्देश जारी किए। सूत्रों के अनुसार, बैठक में उजागर हुआ कि तैनाती से पहले जवानों की समय पर और उचित ब्रीफिंग नहीं की गई थी, जिससे सेक्टर मुख्यालय को कंपनियों की सटीक लोकेशन और गतिविधियों की समयबद्ध जानकारी नहीं मिल सकी।

बैठक में निर्देश दिया गया कि जम्मू-कश्मीर जैसे विशेष अभियान वाले संवेदनशील क्षेत्रों से स्थानांतरित होकर आए जवानों को तुरंत दिल्ली में भीड़ नियंत्रण ड्यूटी पर तैनात न किया जाए। आरएएफ प्रमुख ने कहा कि पूर्वोत्तर या कश्मीर जैसे क्षेत्रों में काम करने का माहौल और परिचालन दृष्टिकोण अलग होता है, जबकि दिल्ली, बिहार या महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिक संतुलित और संवेदनशील दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है।

जवानों को केवल आवश्यकता पड़ने पर, अनुपातिक और निष्पक्ष रूप से बल प्रयोग करने की हिदायत दी गई। यह भी स्पष्ट किया गया कि कोई भी कार्रवाई करने से पहले लाठीचार्ज, आंसू गैस या स्वीकृत साधनों का चरणबद्ध तरीके से इस्तेमाल किया जाए। सोशल मीडिया पर जवानों के बिना हेलमेट और सुरक्षात्मक बॉडी प्रोटेक्टर के दिखने का संज्ञान लेते हुए सभी अधिकारियों को पूर्ण सुरक्षा गियर सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए। इसके अलावा, दिल्ली में तैनात जवानों के लिए पेलेट गन और इलेक्ट्रिक शॉक हथियारों के इस्तेमाल पर फिलहाल रोक लगा दी गई है और केवल आरएएफ प्रशिक्षित कर्मियों को ही ड्यूटी पर भेजने के निर्देश दिए गए हैं।