इराक के शहरों से लेकर लौटेगी यह शवयात्रा
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सुरक्षा और यातायात के बड़े इंतजाम
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गुरुवार को उन्हें दफन किया जाएगा
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पूरी यात्रा में दो करोड़ लोग जुटेंगे
एजेंसियां
तेहरानः सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार की रस्में शनिवार को तेहरान से शुरू हुईं। यह शवयात्रा ईरान के पवित्र शहर कौम से होते हुए पड़ोसी देश इराक के नजफ और करबला शहरों तक जाएगी। इसके बाद शव को वापस ईरान के मशहद शहर लाया जाएगा, जहाँ आगामी गुरुवार को खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक (दफन) किया जाएगा। ईरानी अधिकारियों ने इस पूरी यात्रा के दौरान लगभग 2 करोड़ (20 मिलियन) लोगों के जुटने का दावा किया है। हालांकि, यह आंकड़ा अक्सर जनसमर्थन दिखाने के लिए राजनीतिक प्रचार का हिस्सा होता है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि करना बेहद कठिन है।
प्रशासन ने सुरक्षा और रसद (लॉजिस्टिक्स) को लेकर एक व्यापक और जटिल योजना तैयार की है। इसमें वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध, संभावित हवाई यात्राओं में व्यवधान, हजारों बसों की व्यवस्था, अस्थायी रसोइयां और यात्रियों के ठहरने के लिए स्कूलों व मस्जिदों का उपयोग शामिल है। कट्टरपंथी मेयर अलीरेजा जकानी के नेतृत्व में तेहरान नगर निगम ने 11,000 बसें तैनात की हैं और मेट्रो व बीआरटी लाइनों को चौबीसों घंटे मुफ्त संचालित करने का निर्णय लिया है। बजट की बात करें तो तेहरान के प्रत्येक प्रशासनिक जिले को इन तीन दिवसीय समारोहों के लिए लगभग 5,00,000 से 6,50000 यूरो के बराबर की राशि आवंटित की गई है।
वेल्ट ने सरकार से जुड़े पत्रकारों के हवाले से बताया कि केवल तेहरान शहर का कुल बजट ही लगभग 15 मिलियन (1.5 करोड़) यूरो है, जबकि कौम और मशहद शहरों के लिए अलग से 5-5 मिलियन यूरो आवंटित किए गए हैं। नजफ और करबला में होने वाले कार्यक्रमों के खर्च को जोड़कर, यह आयोजन आधुनिक इतिहास के सबसे महंगे राजकीय अंतिम संस्कारों में से एक बनने जा रहा है।
इस अंतिम संस्कार के पीछे ईरान में गहरा आंतरिक राजनीतिक तनाव भी उभरकर सामने आया है। वेल्ट की रिपोर्ट के अनुसार, कट्टरपंथी समर्थक रात की सभाओं का उपयोग अमेरिका-ईरान ज्ञापन (मेमोरेंडम) की निंदा करने के लिए कर रहे हैं। वे इस वार्ता में शामिल वरिष्ठ अधिकारियों को खुलेआम धमकियां दे रहे हैं, जिनमें विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ शामिल हैं।
सभाओं में शामिल कुछ प्रदर्शनकारी खामेनेई की हत्या का बदला लेने के लिए अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ निरंतर युद्ध जारी रखने की मांग कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कट्टरपंथी धार्मिक प्रचारक हाथों में राइफलें लेकर उग्र और भड़काऊ भाषण देते नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर, ईरान की आम जनता में देश की बदहाल आर्थिक स्थिति, गरीबी और इस खर्चीले आयोजन के लिए सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को लेकर गहरा आक्रोश और हताशा देखी जा रही है।