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अब जंतर मंतर पर नजर आयेगा किसानों का प्रतिनिधिमंडल

एसकेएम ने सीजेपी को अपना समर्थन दिया

  • कहां छात्रों को नैतिक समर्थन देंगे

  • वांगचुक के आंदोलन को भी समर्थन

  • धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ देना चाहिए

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: केंद्र सरकार के अब निरस्त हो चुके कृषि कानूनों के खिलाफ वर्ष 2020-21 के ऐतिहासिक आंदोलन का नेतृत्व करने वाले संयुक्त किसान मोर्चा (ने परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा चलाए जा रहे मौजूदा धरने को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है। मोर्चा ने एलान किया है कि उसका एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल रविवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के साथ धरने में शामिल होगा।

कॉकरोच जनता पार्टी के अध्यक्ष अभिजीत दिपके को लिखे एक आधिकारिक पत्र में, संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि वह इस शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन और इसमें भाग ले रहे छात्रों, युवाओं व उनके परिवारों के साथ पूरी एकजुटता के साथ खड़ा है। तय कार्यक्रम के अनुसार, एसकेएम का प्रतिनिधिमंडल प्रदर्शनकारियों और प्रख्यात पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में रविवार सुबह 11 बजे विरोध स्थल (जंतर-मंतर) का दौरा करेगा। गौरतलब है कि सोनम वांगचुक कई छात्रों के साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

मोर्चा ने अपने पत्र में स्पष्ट किया, हर छात्र को एक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय शिक्षा और परीक्षा प्रणाली प्राप्त करने का अधिकार है। इस संबंध में जवाबदेही सुनिश्चित करना पूरी तरह से सरकार की जिम्मेदारी है। एसकेएम ने बताया कि 17 जून को आयोजित उसकी राष्ट्रीय परिषद की बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसमें छात्र आंदोलन की इस मांग का समर्थन किया गया था कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। इसके साथ ही, बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के तहत शिक्षा क्षेत्र में पनप रही घोटाला संस्कृति का कड़ा विरोध किया गया था। पत्र में मोर्चे ने सीजेपी के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर लगाए गए प्रतिबंध की भी पूर्व में की गई अपनी निंदा को दोहराया।

संयुक्त किसान मोर्चा ने दोनों आंदोलनों की वैचारिक कड़ी को जोड़ते हुए कहा, देश के छात्र और युवा भी किसानों के ही बच्चे हैं और वे भारत का भविष्य हैं। एसकेएम का दृढ़ विश्वास है कि छात्रों और युवाओं का संघर्ष, किसानों का ही संघर्ष है। पत्र में आगे कहा गया कि किसानों और देश के सभी लोकतांत्रिक संगठनों की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे अपनी शिक्षा, उज्ज्वल भविष्य और न्याय के लिए लड़ रहे युवाओं के साथ मजबूती से खड़े हों।

एसकेएम ने उम्मीद जताई कि रविवार को उनके प्रतिनिधिमंडल के इस दौरे से लोकतांत्रिक आंदोलन को और मजबूती मिलेगी। साथ ही, यह सरकार को एक सार्थक बातचीत शुरू करने तथा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से शुरुआत करते हुए आवश्यक कार्रवाई करने के लिए मजबूर करेगा। संयुक्त किसान मोर्चा मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के तीन दर्जन से अधिक किसान संगठनों का एक शीर्ष निकाय (अंब्रेला बॉडी) है। इसी मोर्चे ने तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर साल भर चले बड़े आंदोलन का नेतृत्व किया था। देशव्यापी और निरंतर चले विरोध प्रदर्शनों के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2021 में इन तीनों कानूनों को वापस लेने की घोषणा की थी।