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प्रसिद्ध तारिणी मंदिर की स्थिति को लेकर धर्मप्रेमी काफी चिंतित

मलकनगिरी में जंगल की आग फैलती जा रही है

  • दो दिनों से आग लगातार फैल रही है

  • आशंका है कि किसी ने जानबूझकर लगायी

  • वन विभाग के कर्मचारी दिनरात काम कर रहे

राष्ट्रीय खबर

भुवनेश्वरः यहां के मलकनगिरी जिले के घने जंगलों में स्थित तारिणी मंदिर के आसपास का क्षेत्र इन दिनों प्राकृतिक आपदा की चपेट में है। पिछले 48 घंटों से वहां भीषण जंगल की आग का तांडव जारी है। आग की ऊंची लपटों ने न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया है, बल्कि मलकनगिरी के स्थानीय निवासियों के मन में एक गहरा डर और दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह आग दो दिन पहले शुरू हुई थी। शुरुआती दौर में इसे नियंत्रित न कर पाने के कारण यह तेजी से आसपास के रिहायशी इलाकों की ओर फैल गई। इस आग ने सैकड़ों वर्षों पुराने बहुमूल्य पेड़ों को राख में तब्दील कर दिया है। साथ ही, जंगल में रहने वाले छोटे-बड़े वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट होने से उनकी जान को भी बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है। आग के कारण उठने वाले धुएं के गुबार ने पूरे वातावरण को ढंक लिया है, जिससे सांस लेने में कठिनाई के साथ-साथ दृश्यता भी बेहद कम हो गई है। इसका सीधा असर आसपास के ग्रामीणों की दैनिक दिनचर्या पर पड़ा है, जो अब अपने घरों में कैद होने को मजबूर हैं।

जंगल में आग लगने के कारणों पर प्रशासन और स्थानीय लोग अलग-अलग विचार रख रहे हैं। हालांकि वन विभाग अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा है, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों का एक बड़ा वर्ग इसे मानवीय साजिश मान रहा है। ग्रामीणों को आशंका है कि किसी असामाजिक तत्व या उपद्रवी ने जानबूझकर यह आग लगाई है। यह क्षेत्र पहले से ही भीषण ग्रीष्मकालीन ताप और उमस का सामना कर रहा है। ऐसे में, सूखी पत्तियों और ज्वलनशील वातावरण ने आग को और अधिक आक्रामक बना दिया है।

वन विभाग के कर्मचारियों के लिए इस आग पर काबू पाना एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य रहा। संसाधनों की कमी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच, विभाग के कर्मियों ने कई घंटों तक अथक संघर्ष किया। स्थानीय स्वयंसेवकों के सहयोग से अंततः आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन क्षति का आकलन अभी भी जारी है।

यह घटना केवल एक अकेली दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग और जंगलों की सुरक्षा को लेकर एक चेतावनी है। भविष्य में इस तरह की आपदाओं को रोकने के लिए वन विभाग को अब अग्नि-निवारण प्रणालियों को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता है, ताकि प्रकृति की इस अनमोल धरोहर और वन्यजीवों को सुरक्षित रखा जा सके।