Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
डबल थाई रिप्लांटेशन से मजदूर ने चलना प्रारंभ किया गुजरात मॉडल से देश का भला नहीं होगाः अन्नामलाई अमित शाह तब बच्चे थे जब मैं विधायक बनाः खडगे सत्येंद्र जैन के खिलाफ यह झूठ भी प्रमाणित होगाः केजरीवाल NEET विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश: NTA को बनाएं स्थायी व मजबूत संस्थान, AI और ब्लॉकचेन तकन... कांग्रेस मुख्यालय में CWC की अहम बैठक: खरगे बोले—12 वर्षों में युवाओं का भविष्य तबाह, PM मोदी दें जव... सांप भाग जाने के बाद अब लकीर पीटने का खेल जारी जयपुर एयरपोर्ट पर इंडिगो फ्लाइट की मेडिकल इमरजेंसी लैंडिंग: सूरत से आ रहे यात्री की बिगड़ी तबीयत, अस... चंदा चोरी में उम्मीद के मुताबिक ही एसआईटी की जांच रिपोर्ट आयी है पसंद है तो ज्ञानेश कुमार को अमेरिका ले जाइएः पवन खेड़ा

Bihar Politics: उपेंद्र कुशवाहा के लिए बढ़ी मुश्किलें; विधान परिषद टिकट पर पवन सिंह की एंट्री ने बदला सियासी समीकरण

बिहार डेस्क: बिहार की सियासत में ‘पावर स्टार’ पवन सिंह की सक्रियता ने राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की राजनीतिक रणनीति को एक बार फिर संकट में डाल दिया है। काराकाट लोकसभा चुनाव में कुशवाहा की हार के बाद, अब विधान परिषद (MLC) चुनावों के लिए BJP द्वारा पवन सिंह को मैदान में उतारने के फैसले ने NDA के भीतर नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे दिया है।

📉 क्या कुशवाहा को दरकिनार कर रही है BJP?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि NDA के भीतर उपेंद्र कुशवाहा का महत्व कम हो रहा है। उम्मीद थी कि खाली 9 सीटों में से एक सीट मंत्री दीपक प्रकाश (उपेंद्र कुशवाहा के बेटे) को दी जाएगी, लेकिन BJP ने दीपक प्रकाश के बजाय पवन सिंह को प्राथमिकता दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, BJP ने कुशवाहा के सामने पार्टी विलय का प्रस्ताव रखा था, जिसे लेकर सहमति न बनने पर यह फैसला लिया गया।

⚠️ दीपक प्रकाश की मंत्री पद पर मंडराया संकट

दीपक प्रकाश फिलहाल न तो विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के। संवैधानिक नियमों के अनुसार, बिना सदन का सदस्य बने कोई भी व्यक्ति अधिकतम छह महीने तक ही मंत्री रह सकता है। अब उनके सामने सदस्यता हासिल करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। यदि उन्हें समय रहते सदन में नहीं भेजा गया, तो उनका मंत्री पद खतरे में पड़ सकता है।

🧭 क्या NDA से अलग होंगे उपेंद्र कुशवाहा?

विश्लेषकों का मानना है कि उपेंद्र कुशवाहा अब दोराहे पर हैं। यदि वे NDA से अलग होने का साहसी निर्णय लेते हैं, तो उनके सामने अपनी पार्टी के विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती होगी। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के चार विधायकों में से तीन का असंतोष पहले ही सामने आ चुका है। दूसरी ओर, BJP अब कुशवाहा समुदाय के नए चेहरे के रूप में सम्राट चौधरी को मजबूती से पेश कर रही है, जिससे कुशवाहा का कद कम होता दिख रहा है।