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इंडिया गठबंधन की बैठक आठ जून को

कई सहयोगी चुनाव और फैसलों की वजह से नाराज

  • द्रमक अपने राज्य की वजह से नाराज

  • टीएमसी पहले से ही दूर हो गयी थी

  • आम आदमी पार्टी ने नाता तोड़ा था

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्लीः विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया की एक महत्वपूर्ण बैठक आगामी 8 जून को राजधानी दिल्ली में आयोजित की जाएगी। जून 2024 के बाद से विभिन्न विधानसभा चुनावों में मिली लगातार हार और आंतरिक मतभेदों के चलते यह बैठक गठबंधन के भविष्य और उसकी रणनीति के लिहाज से बेहद निर्णायक मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में करीब 17 विपक्षी दलों के शामिल होने की संभावना है। बैठक में कुछ प्रमुख चेहरे और उनके शामिल होने की उम्मीद है।

लंबे समय से गठबंधन से दूरी बनाए रखने वालीं तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस बैठक में भाग लेने की प्रबल संभावना है। उनके साथ पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी हो सकते हैं। हाल ही में अभिषेक पर हुए हमले के बाद कई विपक्षी दलों ने उनके समर्थन में एकजुटता दिखाई थी, जो शायद इस जुड़ाव का आधार बन रहा है।

बैठक में डीएमके की भूमिका पर सबकी नजरें होंगी। तमिलनाडु में कांग्रेस द्वारा तमिगा वेत्री कजगम (TVK) के साथ गठबंधन कर सरकार में शामिल होने के फैसले से डीएमके कांग्रेस से नाराज है। पार्टी ने संसद में भी कांग्रेस से अलग बैठने की मांग की है, जो गठबंधन में बढ़ते तनाव को दर्शाता है।

बैठक में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के शामिल होने की पुष्टि हुई है। गठबंधन से लगभग एक साल पहले नाता तोड़ चुकी आम आदमी पार्टी के इस बैठक में शामिल होने की संभावना न के बराबर है, विशेष रूप से पंजाब में कांग्रेस के साथ उनके राजनीतिक टकराव को देखते हुए। विपक्ष इस बैठक के माध्यम से एक संयुक्त मोर्चा पेश करने की कोशिश करेगा। वरिष्ठ विपक्षी नेताओं का मानना है कि भाजपा को भले ही सत्ता हासिल है, लेकिन उन्हें 37 फीसद वोट ही मिले हैं। शेष 63 प्रतिशत मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले दलों को एक मंच पर लाना गठबंधन की प्राथमिक रणनीति है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा विशेष गहन संशोधन अभ्यास के सत्यापन के बाद, विपक्षी दल चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर अपनी रणनीति को और धार देंगे। राहुल गांधी द्वारा लगातार उठाए जा रहे आर्थिक मंदी  के मुद्दे को गठबंधन अपने मुख्य चुनावी अभियान का हिस्सा बनाने की तैयारी में है। यह बैठक दिसंबर 2023 के बाद पहली बार है जब शीर्ष नेतृत्व एक साझा मंच पर आ रहा है। देखना यह होगा कि क्या यह बैठक विपक्षी गठबंधन में आई दरारों को भर पाएगी या यह केवल एक प्रतीकात्मक मिलन बनकर रह जाएगी।