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पीठ में  पीठ में छुरा घोंपने वाली कार्रवाईः डीएमके

विजय की पार्टी को कांग्रेस के समर्थन पर नाराजगी

  • भाजपा को रोकना जरूरीः कांग्रेस

  • एआईएडीएमके में फूट के आसार

  • पड़ोसी राज्य में कांग्रेस की वापसी

राष्ट्रीय खबर

चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। दशकों पुराने सहयोगियों, द्रमुक और कांग्रेस के बीच दरार अब खुले संघर्ष में बदल गई है। अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम को सरकार बनाने के लिए कांग्रेस द्वारा समर्थन दिए जाने के फैसले पर डीएमके ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कांग्रेस को पीठ में छुरा घोंपने वाला करार दिया है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस की संसदीय कार्य समिति की देर रात हुई बैठक में विजय की टीवीके को समर्थन देने का निर्णय लिया गया। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस तमिलनाडु में एक धर्मनिरपेक्ष सरकार चाहती है और वह भाजपा या उसके प्रतिनिधियों को सत्ता से दूर रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

हालांकि, डीएमके प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस ने खुद को मूर्ख साबित किया है। उन्होंने राहुल गांधी और विजय की एक तस्वीर साझा करते हुए कहा कि कांग्रेस के किसी अति-उत्साही नेता ने सब कुछ बिगाड़ दिया है। इससे तमिलनाडु की वर्तमान राजनीतिक स्थिति बेहद जटिल हो गई है।डीएमके नेताओं का कहना है कि महज 5 सीटों वाली कांग्रेस, विजय की सरकार बनाने में कोई बड़ी भूमिका नहीं निभा सकती। टी.के.एस. एलंगोवन ने चेतावनी दी कि कांग्रेस का यह रवैया उसे दिल्ली और पश्चिम बंगाल की तरह तमिलनाडु में भी खत्म कर देगा।

दूसरी ओर, 43 सीटें जीतने वाली एआईएडीएमके में भी आंतरिक कलह शुरू हो गई है। पार्टी के भीतर इस बात को लेकर गहरे मतभेद हैं कि क्या उन्हें विजय का समर्थन करना चाहिए। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व भी कांग्रेस को सत्ता में शामिल होने से रोकने के लिए एआईएडीएमके पर दबाव बना रहा है।

तमिलनाडु में अब गठबंधन की राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर है। जहां एक तरफ कांग्रेस, विजय के साथ मिलकर सरकार बनाने की कोशिश में है, वहीं डीएमके अपने पुराने साथी के इस धोखे से आहत है। भाजपा की रणनीति चेन्नई में कांग्रेस समर्थित सरकार को रोकने की है, विशेषकर पड़ोसी राज्य केरल में कांग्रेस की हालिया जीत के बाद।