Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
JPSC पेपर लीक मामला: CID ने पूर्व अध्यक्ष खियांगते को लिया हिरासत में, 17वें दिन भी छात्रों का प्रदर... कई तटीय शहर समुद्र के बढ़ने से भी तेजी से डूब रहे दिल्ली विधानसभा में पेश 2024-25 की CAG रिपोर्ट: सब्सिडी में 172% की बढ़ोतरी, घटकर 3,695 करोड़ हुआ कै... जयपुर में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला: डीप-टेक रोबोटिक कंपनी से सीक्रेट कोडिंग और LiDAR सेंसर च... पेपर लीक के 'Proceeds of Crime' की होगी जांच: ED खंगालेगी पूरा नेटवर्क, NEET-UG मामले में भी जल्द हो... केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा का राहुल गांधी पर बड़ा हमला, बोले— "राहुल हर दिन बदलते हैं गोलपोस्ट, फैला... मानसून सत्र के अंतिम 2 दिन: छात्र लाठीचार्ज पर चर्चा को तैयार सरकार, क्या JPC को भेजा जाएगा FCRA संश... यह 79 फीट लंबा समुद्र का दैत्य हुआ करता था, देखें वीडियो दिल्ली विधानसभा में सीएम रेखा गुप्ता का बड़ा वक्तव्य, कहा— "First in My Bloodline" हर बेटी के सशक्ति... दिल्ली और झारखंड में छात्रों पर बल प्रयोग पर भड़के राहुल गांधी, राम मंदिर में कथित चोरी पर भी पीएम म...

हरभजन सिंह की 23 सदस्यीय सुरक्षा घेरा हाई कोर्ट के रडार पर

किसके कहने पर दिये पंद्रह अतिरिक्त कर्मी

  • इस टीम में 23 लोग शामिल थे

  • कागज पर सिर्फ आठ की तैनाती

  • मोगा की जांच से राज खुलता गया

राष्ट्रीय खबर

चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने राज्यसभा सांसद और पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह की सुरक्षा में तैनात पंजाब पुलिस के 23 कर्मियों की भारी-भरकम संख्या पर कड़े सवाल उठाए हैं। न्यायमूर्ति जगमोहन बंसल की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार केवल 8 कर्मियों की ही मंजूरी दी गई थी, जबकि ऐसा प्रतीत होता है कि 15 पुलिस अधिकारियों को अनौपचारिक रूप से उनके साथ जोड़ा गया है।

न्यायमूर्ति बंसल ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। अदालत ने आदेश दिया है कि सबसे पहले मोगा जिले से एक व्यापक अभ्यास शुरू किया जाए ताकि यह पता लगाया जा सके कि वहां कितने लोगों को सुरक्षा कवर मिला हुआ है और उनमें से कितनों के साथ आधिकारिक और अनौपचारिक रूप से पुलिसकर्मी तैनात हैं। अदालत ने एडीजीपी (सुरक्षा) और एसएसपी, मोगा को विस्तृत हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही, राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि याचिकाकर्ताओं या उनके परिवारों को कोई शारीरिक क्षति न पहुँचे।

अपनी याचिका में हरभजन सिंह ने तर्क दिया कि उनकी सुरक्षा में कटौती का आदेश बिना किसी ताज़ा खतरे के आकलन और बिना किसी पूर्व नोटिस के पारित किया गया था। उन्होंने बताया कि वह 2022 में आम आदमी पार्टी की ओर से राज्यसभा सदस्य चुने गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा द्वारा पार्टी छोड़ने की घोषणा के ठीक एक दिन बाद, जिसमें हरभजन का नाम भी शामिल था, उनकी सुरक्षा बिना किसी नई रिपोर्ट के वापस ले ली गई।

अदालत के सामने दो अलग-अलग याचिकाएं आईं, जिनमें सुरक्षा व्यवस्था का चौंकाने वाला अंतर दिखा। एक तरफ सांसद के पास 23 कर्मियों का घेरा था, वहीं दूसरी ओर एक अन्य याचिकाकर्ता—जो एक पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष और सरकारी ठेकेदार है—को एक गैंग द्वारा जानलेवा हमले और फायरिंग के बावजूद केवल एक एएसआई की सुरक्षा दी गई, वह भी केवल दिन के समय।

याचिकाकर्ता के वकील अरमान सागर ने बताया कि 1 नवंबर, 2025 को उनके मुवक्किल पर फायरिंग हुई थी, जिसकी जिम्मेदारी एक गैंग ने ली थी। हथियारों की बरामदगी और कुछ गिरफ्तारियों के बावजूद, उनकी सुरक्षा बढ़ाए जाने के बजाय कम कर दी गई। अदालत ने इस असमानता पर कड़ा रुख अपनाया है और मामले की अगली सुनवाई 20 मई के लिए निर्धारित की है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि अब कोई और स्थगन नहीं दिया जाएगा।