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केंद्र ने राघव चड्डा को दी जेड श्रेणी सुरक्षा

आम आदमी पार्टी और भाजपा का खेल अब सामने आया

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की सुरक्षा को लेकर केंद्र और पंजाब सरकार के बीच कूटनीतिक और राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है। पंजाब की आप सरकार द्वारा चड्ढा की जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा वापस लिए जाने के महज कुछ ही घंटों के भीतर, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हस्तक्षेप करते हुए उन्हें जेड श्रेणी की सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब राघव चड्ढा और उनकी अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच दूरियां बढ़ती नजर आ रही हैं।

सूत्रों के अनुसार, पंजाब पुलिस ने राघव चड्ढा की सुरक्षा में तैनात 41 कर्मियों वाले जेड प्लस कवर को बुधवार को पूरी तरह से हटा लिया और सभी सुरक्षाकर्मियों को तुरंत मुख्यालय रिपोर्ट करने का आदेश दिया। इस कार्रवाई के तुरंत बाद, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इंटेलिजेंस ब्यूरो की थ्रेट परसेप्शन रिपोर्ट के आधार पर चड्ढा को दिल्ली और पंजाब में जेड श्रेणी की सुरक्षा देने का निर्णय लिया। वर्तमान में दिल्ली पुलिस को उनकी सुरक्षा का जिम्मा संभालने का निर्देश दिया गया है जब तक कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की औपचारिक तैनाती नहीं हो जाती।

राघव चड्ढा की सुरक्षा में कटौती का यह कदम उन्हें राज्यसभा में पार्टी के उप-नेता के पद से हटाए जाने के ठीक बाद उठाया गया है। पार्टी ने उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त किया है। आप के भीतर चल रही चर्चाओं के अनुसार, चड्ढा पर आरोप है कि उन्होंने संसद में पंजाब के प्रमुख मुद्दों, जैसे ग्रामीण विकास कोष के बकाया 8,500 करोड़ और जीएसटी मुआवजे से जुड़े मामलों को प्रभावी ढंग से नहीं उठाया।

पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन के चुनावों और बीसीसीआई चुनावों में उनके द्वारा समर्थित उम्मीदवार के रुख से भी जुड़ी बताई जा रही हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी हाल ही में चड्ढा की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी की थी, जिससे दरार और गहरी होती दिखी।

राघव चड्ढा, जो कभी अरविंद केजरीवाल के सबसे करीबी सलाहकारों में गिने जाते थे, अब पार्टी में हाशिए पर नजर आ रहे हैं। स्वाति मालीवाल के बाद वे दूसरे ऐसे प्रमुख राज्यसभा सांसद हैं जिनका पार्टी नेतृत्व के साथ सीधा टकराव सामने आया है। केंद्र द्वारा उन्हें सुरक्षा दिए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हैं कि क्या चड्ढा किसी नए राजनीतिक विकल्प की तलाश में हैं। चड्ढा ने इन बदलावों पर अपनी प्रतिक्रिया में केवल इतना कहा है कि उन्हें खामोश किया गया है, पराजित नहीं।