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ईरान की मच्छर फ्लीट का मुकाबला नहीं है

चाहकर भी होर्मुज में अमेरिका अधिक आक्रामक नहीं हो पा रहा है

एजेंसियां

दुबईः ईरान की नौसेना के संदर्भ में मॉस्किटो फ्लीट (मच्छर नौसेना) का अर्थ उसकी उस रणनीतिक शक्ति से है, जो भारी भरकम युद्धपोतों के बजाय सैकड़ों छोटी, तेजतर्रार और घातक नावों पर टिकी है। हालिया संघर्षों और रिपोर्टों के अनुसार, भले ही ईरान की पारंपरिक नौसेना के बड़े जहाजों को काफी नुकसान पहुंचा हो, लेकिन उसकी असली समुद्री ताकत—यानी यह मच्छर बेड़ा—आज भी उतनी ही सक्रिय और खतरनाक बनी हुई है।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स द्वारा संचालित इस बेड़े में हजारों की संख्या में छोटी नावें शामिल हैं। इनमें से कई नावें ब्रिटिश ब्लेडरनर जैसी रेसिंग बोट्स की नकल पर बनाई गई हैं, जो समुद्र में अत्यधिक गति (करीब 50-70 समुद्री मील) से चलने में सक्षम हैं।

इस बेड़े की कई मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं। ये नावें अकेले हमला करने के बजाय एक साथ 20 से 40 के झुंड में हमला करती हैं। यह तकनीक अमेरिकी नौसेना के परिष्कृत रक्षा तंत्र (जैसे एजिस कॉम्बैट सिस्टम) को उलझाने और उसे ओवरलोड करने के लिए बनाई गई है। अपनी छोटी बनावट और पानी की सतह के बेहद करीब होने के कारण, इन्हें पारंपरिक रडार प्रणालियों द्वारा समय रहते पहचानना मुश्किल होता है। अमेरिकी सेना को इन्हें ट्रैक करने के लिए विशेष रूप से ड्रोन और हेलीकॉप्टरों की भारी तैनाती करनी पड़ती है।  जहाँ एक अमेरिकी विध्वंसक की कीमत अरबों डॉलर होती है, वहीं ये नावें बेहद सस्ती हैं। ईरान इन्हें युद्ध के दौरान भी जल्दी से दोबारा बना सकता है।

दुनिया के कुल समुद्री तेल परिवहन का लगभग पांचवां हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यहाँ की भौगोलिक स्थिति ईरान के पक्ष में है। यह रास्ता इतना संकरा है कि वाणिज्यिक जहाजों को ईरान के तट के बेहद करीब से गुजरना पड़ता है।

2026 के आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में अब तक करीब 26 जहाजों पर हमले हो चुके हैं। ईरान ने यहाँ न केवल इन नावों का उपयोग किया है, बल्कि मछुआरों की नावों का उपयोग करके गुप्त रूप से समुद्री बारूदी सुरंगें भी बिछाई हैं। हडसन इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट बताती है कि ईरान का लक्ष्य कोई निर्णायक नौसैनिक युद्ध जीतना नहीं, बल्कि वैश्विक समुद्री अर्थव्यवस्था में घर्षण पैदा करना है ताकि अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जा सके।

मई 2026 की ताजा जानकारी के अनुसार, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य की अपनी परिभाषा को 30 मील से बढ़ाकर 300 मील तक कर दिया है और सुरक्षित मार्ग के लिए भारी टोल वसूलने की योजना बनाई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी नौसेना के समुद्र की तलहटी में होने के दावों के बावजूद, विश्लेषकों का मानना है कि ईरानी सेना का यह असममित बेड़ा अभी भी अक्षुण्ण है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक निरंतर खतरा बना हुआ है।