Breaking News in Hindi

ईरान युद्ध और वार्ता को लेकर परेशान है बेंजामिन नेतन्याहू

अमेरिकी समझौता के फायदेमंद नहीं होने का भय

एजेंसियां

येरुशलमः इजरायल और अमेरिका के बीच ईरान को लेकर चल रहे कूटनीतिक मतभेदों ने एक नया मोड़ ले लिया है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल को डर है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ एक ऐसा अधूरा समझौता कर सकते हैं, जिससे युद्ध के मुख्य उद्देश्य अधूरे रह जाएंगे।

इजरायली सूत्रों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर तो ध्यान केंद्रित कर रहा है, लेकिन बैलिस्टिक मिसाइल और क्षेत्रीय प्रॉक्सी नेटवर्क (जैसे हिजबुल्ला और हमास) के मुद्दों को दरकिनार कर सकता है। इजरायल के अनुसार, यदि ईरान के पास मिसाइल क्षमताएं बनी रहती हैं, तो भविष्य में वह फिर से खतरा पैदा कर सकता है।

युद्ध के दौरान ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों पर 1,000 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। इजरायली अधिकारियों को डर है कि समझौते से ईरान पर आर्थिक दबाव कम होगा, जिससे शासन को स्थिरता और धन मिलेगा।

प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले पांच शर्तें रखी थीं (परमाणु सामग्री हटाना, बुनियादी ढांचा नष्ट करना, मिसाइलें रोकना, प्रॉक्सी नेटवर्क खत्म करना और सख्त निरीक्षण)। लेकिन हाल ही में उन्होंने अपना ध्यान केवल परमाणु सामग्री हटाने पर केंद्रित कर दिया है, जो उनके लक्ष्यों में कटौती का संकेत देता है।

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स का कहना है कि ट्रंप के पास बातचीत के सभी पत्ते हैं। उन्होंने दावा किया कि:

ईरान की नौसेना डूब चुकी है और उसके मिसाइल उत्पादन केंद्र नष्ट हो गए हैं। अमेरिकी नौसेना की घेराबंदी के कारण ईरान को रोजाना 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है। ट्रंप प्रशासन अब युद्ध को आगे बढ़ाने के बजाय कूटनीतिक समाधान चाहता है, क्योंकि युद्ध के कारण अमेरिका में गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं।

यह विवाद 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद पैदा हुआ है, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु हो गई थी। फिलहाल एक अस्थिर युद्धविराम चल रहा है, लेकिन इजरायल अभी भी युद्ध के पूर्ण लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए दबाव बना रहा है।