टाईगर सफारी में पर्यटकों की हरकतों पर फिर चेतावनी
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इतनी करीबी जानलेवा खतरा है
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बाघों को हल्के में लेना गलत है
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यह वन्यजीवन से खिलवाड़ है
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः जंगल सफारी के दौरान एक ही स्थान पर दो-दो बाघों को देखना किसी भी पर्यटक के लिए जीवन भर का यादगार अनुभव हो सकता है, लेकिन हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो ने इस रोमांच के पीछे छिपे गंभीर खतरों और मानवीय लापरवाही को उजागर कर दिया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि दो बाघ पथरीली जमीन पर गश्त कर रहे हैं और उन्हें दर्जनों सफारी जिप्स ने चारों तरफ से घेर रखा है। पर्यटक बेहद करीब से मोबाइल के जरिए तस्वीरें और वीडियो बनाने में मशगूल हैं।
देखें घटना का शेयर किया गया वीडियो
भारतीय वन सेवा के पूर्व अधिकारी सुशांत नंदा ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए गहरी नाराजगी और चिंता व्यक्त की है। उन्होंने पर्यटकों को सावधान करते हुए लिखा, बाघों की यह आपसी लड़ाई या उनकी मौजूदगी आपके जीवन का आखिरी दृश्य साबित हो सकती है। ऐसी जगहों पर कभी भी भीड़ न लगाएं। नंदा ने जोर देकर कहा कि केवल कड़े नियमों के जरिए वन्यजीवों और इंसानों के बीच की इस दूरी को बनाए रखना संभव नहीं है; इसके लिए पर्यटकों को भी जिम्मेदार व्यवहार करना होगा और वन्यजीवों की निजता का सम्मान करना होगा।
वीडियो के अंत में स्थिति तब और भी खतरनाक हो जाती है जब दोनों बाघ अचानक सड़क पार करने के लिए छलांग लगाते हैं। जिप्स में सवार लोग वहां से हटने के बजाय और करीब जाकर तस्वीरें लेते नजर आते हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह बाघों को वाहनों से घेर लेना और शोर मचाना न केवल जंगल के नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह बाघों को उत्तेजित भी कर सकता है। यदि बाघ डर या गुस्से में हमला कर देते, तो यह एक बड़ी त्रासदी बन सकती थी।
यह घटना वन्यजीव पर्यटन की नैतिकता पर एक नई बहस छेड़ती है। संरक्षणवादियों का कहना है कि सफारी का अर्थ प्रकृति के प्रति सम्मान, धैर्य और शांति होना चाहिए, न कि फोटो के चक्कर में अपनी और जानवरों की जान जोखिम में डालना। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो किस राष्ट्रीय उद्यान का है, लेकिन इसने पर्यटन प्रबंधन और पर्यटकों की मानसिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।