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नरेंद्र मोदी सरकार को भारतीय रिजर्व बैंक से फिर मिला धन

आरबीआई ने इस बार 2.86 लाख करोड़ दिये

  • केंद्रीय निदेशक मंडल की बैठक में प्रस्ताव

  • काम काज में हर तरफ तरक्की हुई है

  • बैलेंस शीट में भी भारी बढ़ोत्तरी हुई

राष्ट्रीय खबर

मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को अधिशेष (सरप्लस) के रूप में रिकॉर्ड 2.86 लाख करोड़ रुपये के हस्तांतरण को मंजूरी दे दी है। यह केंद्रीय बैंक द्वारा अब तक के सबसे अधिक लाभांश (डिविडेंड) भुगतानों में से एक है। यह निर्णय कल मुंबई में गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में आयोजित भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल की 623वीं बैठक में लिया गया।

आरबीआई ने एक बयान में कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान उसकी सकल आय (ग्रॉस इनकम) में 26.42 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि जोखिम प्रावधानों (रिस्क प्रोविजन्स) से पहले व्यय में 27.60 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। केंद्रीय बैंक के अनुसार, जोखिम प्रावधानों और वैधानिक कोषों में हस्तांतरण से पहले शुद्ध आय (नेट इनकम) वित्त वर्ष 2025-26 में 3.95 लाख करोड़ रही, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 3.13 लाख करोड़ थी। इस साल 31 मार्च तक आरबीआई का बैलेंस शीट भी 20.61 प्रतिशत बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

केंद्रीय बैंक ने आगे बताया कि उसने संशोधित आर्थिक पूंजी ढांचे (इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क) के तहत आरबीआई के बैलेंस शीट के 6.5 प्रतिशत पर बफर को बनाए रखते हुए, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आकस्मिक जोखिम बफर (कंटिंजेंट रिस्क बफर) के मद में 1.09 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित करने का निर्णय लिया है। बैठक के दौरान बोर्ड ने वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिदृश्य की समीक्षा की, जिसमें आर्थिक दृष्टिकोण के प्रति संभावित जोखिम भी शामिल थे, और वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आरबीआई के वार्षिक खातों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।