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लातिन अमेरिकी वामपंथी नेताओं की स्पेन में बैठक

अमेरिका महाद्वीप में ही ट्रंप के वर्चस्व को चुनौती की तैयारी

एजेंसियां

मेक्सिको सिटी: हाल ही में बार्सिलोना, स्पेन में वामपंथी नेताओं के एक हाई-प्रोफाइल जमावड़े ने वैश्विक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। स्पेन के समाजवादी प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ द्वारा आयोजित इस बैठक को एक ऐसी व्यापक भू-राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जो लातिन अमेरिका और उसके बाहर संयुक्त राज्य अमेरिका के पारंपरिक प्रभाव को कड़ी चुनौती दे सकती है।

इस शिखर सम्मेलन में ब्राजील के राष्ट्रपति लुला डी सिल्वा, कोलंबिया के गुस्तावो पेट्रो और मेक्सिको की नवनिर्वाचित राष्ट्रपति क्लॉडिया शिनबाम जैसे दिग्गज नेता एक साथ नज़र आए। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इस मंच का उद्देश्य असमानता, जलवायु परिवर्तन और दुनिया भर में दक्षिणपंथी राजनीतिक आंदोलनों के उदय जैसे विषयों पर चर्चा करना बताया गया था, लेकिन वहां से निकलने वाली बयानबाजी ने वाशिंगटन और अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन अमेरिका के विरुद्ध एक समन्वित राजनीतिक शक्ति तैयार करने की दिशा में एक ठोस कदम हो सकता है। प्रधानमंत्री सांचेज़ ने ट्रंप प्रशासन का सीधा नाम लिए बिना अमेरिकी विदेश नीति की परोक्ष रूप से कड़ी आलोचना की। उन्होंने शक्ति के उपयोग के सामान्यीकरण और अंतरराष्ट्रीय कानून को कमजोर करने के प्रयासों के प्रति दुनिया को आगाह किया।

इसके अलावा, उन्होंने वैश्विक संस्थानों में सुधार की पुरजोर वकालत करते हुए तर्क दिया कि वर्तमान व्यवस्था अब आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं का प्रतिनिधित्व नहीं करती है। यह रुख स्पष्ट रूप से उन निकायों में लंबे समय से चले आ रहे अमेरिकी नेतृत्व को चुनौती देता है।

विश्लेषक सोतो के अनुसार, बार्सिलोना शिखर सम्मेलन पेड्रो सांचेज़ के उस सचेत प्रयास को दर्शाता है, जिसके माध्यम से वह खुद को एक उभरते हुए प्रगतिशील गुट के अग्रणी नेता के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। यह स्थिति स्पेन के लिए काफी जटिल है, क्योंकि वह यूरोपीय संघ और नाटो जैसे संगठनों का हिस्सा है, जो पारंपरिक रूप से वाशिंगटन के साथ खड़े रहते हैं।

बावजूद इसके, सांचेज़ ने चीन के साथ संबंधों को गहरा किया है और ग्लोबल साउथ के नेताओं के साथ अपनी निकटता बढ़ाई है। यह उनकी दोहरी-ट्रैक वाली विदेश नीति को दर्शाता है, जो अमेरिकी प्रभाव से अधिक स्वायत्तता और स्वतंत्रता की तलाश में है।