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राज्य के डॉक्टरों ने एंटीवेनम के जोखिमों पर ध्यान किया

केरल में सर्पदंश से मौत के बीच नई चेतावनी

  • दवा से साइड एफेक्ट भी खतरनाक

  • गंभीर एलर्जी पर ध्यान देने जरूरी

  • डाक्टरों की निगरानी बहुत जरूरी है

राष्ट्रीय खबर

तिरुअनंतपुरमः केरल में सर्पदंश की घटनाओं और उससे होने वाली मौतों में हालिया वृद्धि के बीच, केरल गवर्नमेंट मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन ने जनता से सर्पदंश के उपचार में शामिल व्यावहारिक चुनौतियों और रोगी सुरक्षा जोखिमों को समझने का आग्रह किया है।

एसोसिएशन ने उपचार सुविधाओं के विस्तार के सरकारी कदम का स्वागत करते हुए स्पष्ट किया कि एंटी-स्नेक वेनम देने से गंभीर एलर्जी प्रतिक्रियाओं का खतरा रहता है, जिसमें जानलेवा एनाफिलेक्सिस भी शामिल है। बयान में जोर दिया गया कि ऐसे मामलों में निरंतर निगरानी, वेंटिलेटर की उपलब्धता और श्वसन संकट या कार्डियक अरेस्ट जैसी जटिलताओं को संभालने के लिए डॉक्टरों की निरंतर उपस्थिति अनिवार्य है।

इससे पहले, स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने जनता को सर्पदंश के मामले में तुरंत 108 डायल करने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा कि राज्य की कनिवु 108 एम्बुलेंस सेवा एंटीवेनम से लैस अस्पतालों तक समय पर पहुंच सुनिश्चित करती है, जहां प्रशिक्षित तकनीशियन प्राथमिक उपचार प्रदान करते हैं।

केरल में पिछले एक सप्ताह में सर्पदंश से चार मौतें हुई हैं। मृतकों में अलाप्पुझा की 65 वर्षीय इंदिरा और 42 वर्षीय सेलीना, अज़ूर का आठ वर्षीय दीक्षाल दिलीप और त्रिशूर का आठ वर्षीय अल्जो शामिल हैं। डाक्टरों के संगठन ने प्रमुख अस्पतालों में जनशक्ति और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया है।

एसोसिएशन ने बताया कि अधिकांश सरकारी अस्पतालों के कैजुअल्टी विभाग अत्यधिक भीड़भाड़ वाले हैं, जहाँ अक्सर एक ही डॉक्टर बड़ी संख्या में मरीजों को संभालता है। एसोसिएशन ने मांग की है कि गंभीर मरीजों को प्राथमिकता देने के लिए एक वैज्ञानिक ट्राइएज प्रणाली लागू की जाए।

कैजुअल्टी विभागों में हर समय कम से कम दो डॉक्टर तैनात किए जाएं। वेंटिलेटर और आईसीयू सुविधाओं में सुधार किया जाए ताकि एएसवी के बाद होने वाली एलर्जी को संभाला जा सके। डॉक्टरों ने सरकार से युद्धस्तर पर बुनियादी ढांचे में सुधार करने का आग्रह करते हुए कहा है कि व्यवस्थागत कमियों के लिए डॉक्टरों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।