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भाजपा प्रत्याशी शुभेंदु को दौड़ा दौड़ाकर पीटा

मतदान के पहले चरण में व्यापक हिंसा का वीडियो जारी

  • घटना का क्रम और भाजपा के आरोप

  • आयोग की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

  • अंगरक्षक ने किसी तरह बचाकर निकाला

राष्ट्रीय खबर

दक्षिण दिनाजपुर: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के प्रथम चरण के दौरान गुरुवार को चुनावी हिंसा का एक विचलित करने वाला मामला सामने आया। दक्षिण दिनाजपुर जिले के कुमारगंज निर्वाचन क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार शुभेंदु सरकार पर भीड़ द्वारा हमला किया गया। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें प्रत्याशी को अपनी जान बचाने के लिए खेतों में भागते हुए देखा जा सकता है, जबकि एक उग्र भीड़ उनका पीछा कर रही है।

भाजपा ने इस हमले का सीधा आरोप सत्तारूढ़ अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों पर लगाया है। पार्टी के अनुसार, शुभेंदु सरकार को सूचना मिली थी कि क्षेत्र के कई मतदान केंद्रों पर धांधली हो रही है और भाजपा के एजेंटों को डराकर बाहर निकाला जा रहा है। जब वे स्थिति का जायजा लेने और अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने पहुंचे, तब उन पर यह प्राणघातक हमला हुआ।

शुभेंदु सरकार ने स्वयं आपबीती सुनाते हुए बताया कि कुमारगंज के लगभग 8 से 10 मतदान केंद्रों से उनके पोलिंग एजेंटों को डरा-धमकाकर जबरन बाहर कर दिया गया था। उन्होंने कहा, मैंने व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप कर उन एजेंटों को फिर से बूथ के अंदर बिठाया। लेकिन जैसे ही मैं बूथ संख्या 24 पर पहुँचा, वहाँ मौजूद भीड़ ने मुझ पर और मेरी टीम पर अचानक हमला बोल दिया।

इस घटना ने चुनाव के दौरान सुरक्षा इंतजामों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुभेंदु सरकार के अनुसार, जिस वक्त उन पर हमला हुआ, मतदान केंद्र के भीतर केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात थे, लेकिन वे परिसर के अंदर ही सीमित रहे। उन्होंने बताया, जब भीड़ ने मुझे घेरकर पीटना शुरू किया, तब मेरे साथ केवल मेरा एक अंगरक्षक मौजूद था। हमलावर स्पष्ट रूप से मतदाताओं और हमारे समर्थकों के बीच भय का माहौल पैदा करना चाहते थे।

वीडियो साक्ष्य और भाजपा की औपचारिक शिकायत के बाद, निर्वाचन आयोग ने मामले का संज्ञान लिया है। जिला निर्वाचन अधिकारी से इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। क्षेत्र में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। हालांकि, टीएमसी नेतृत्व ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए इसे भाजपा का आंतरिक कलह या चुनावी स्टंट करार दिया है। पहले चरण के मतदान में इस तरह की हिंसा ने आने वाले चरणों के लिए सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।