Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
बालों के झड़ने के पीछे कहीं प्रोटीन की कमी तो नहीं? जानें शरीर में दिखने वाले 5 संकेत और घरेलू उपाय मुजफ्फरनगर: दृष्टिहीन सत्येंद्र की अटूट शिवभक्ति! बिना किसी साथी के लाठी के सहारे 3 दिन में तय किया ... बसपा के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह के निधन पर मायावती ने जताया गहरा शोक, बताया पार्टी का वफादार स्त... डांगावास हत्याकांड: 11 साल बाद अदालत का बड़ा फैसला, CBI सबूत साबित करने में नाकाम, सभी 40 आरोपी बरी अजमेर नगर निगम की अनूठी पर्यावरण पहल, दरगाह और पुष्कर ब्रह्मा मंदिर के फूलों से बनेगी जैविक खाद नागपुर में डॉक्टर के बेटे की दरिंदगी: 16 वर्षीय छात्रा को 24 घंटे बंधक बना चाबुक और चाकू से दी खौफना... बांके बिहारी आने वाले श्रद्धालुओं को जाम से मिलेगी मुक्ति! ₹6,922 करोड़ की मथुरा हेरिटेज सिटी परियोज... दरगाह आला हजरत उर्स-ए-रजवी में मिसाल: सावन के सम्मान में नहीं बनेगी नॉनवेज बिरयानी, परोसा जाएगा शाका... कांवड़ यात्रा पर दारुल उलूम देवबंद की एडवाइजरी: छात्रों के लिए आईडी कार्ड अनिवार्य, कांवड़ रूट से दू... रांची में छात्र आंदोलन का सबसे बड़ा दिन: विधानसभा सत्र की शुरुआत के बीच क्या सरकार से होगी वार्ता?

SC on Caste Census: जाति जनगणना पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, याचिकाकर्ता को फटकार लगा CJI ने खारिज की PIL

सुप्रीम कोर्ट ने जाति आधारित जनगणना रोकने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. बताया जा रहा है कि शुक्रवार को SC में सुनवाई के दौरान केंद्र को जाति आधारित जनगणना रोकने का निर्देश देने का अनुरोध करने वाली याचिका कर दिया गया है. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका में इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर याचिकाकर्ता को फटकार भी लगाई.

प्रधान न्यायाधीश (CJI)सूर्यकांत सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से पेश हुए याचिकाकर्ता से स्पष्ट रूप से नाराज दिखे. उन्होंने कहा, आपने अपनी याचिका में बदतमीजी की भाषा लिखी है. आपने किससे अपनी याचिका लिखवाई है. प्रधान न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता से कहा, आप कहां से ऐसी भाषा लिखते हो याचिका में. बताया जा रहा है कि प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली इस पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली भी शामिल थे. पीठ ने इस याचिका को खारिज कर दिया. याचिका में केंद्र को एकल संतान वाले परिवारों को आर्थिक प्रोत्साहन देने के लिए नीतियां बनाने का निर्देश दिए जाने का भी अनुरोध किया गया है.

देश की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना होगी

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले दो फरवरी को भी एक अन्य जनहित याचिका पर भी विचार करने से इनकार कर दिया था जिसमें 2027 की आम जनगणना में नागरिकों के जाति संबंधी आंकड़ों को दर्ज करने, वर्गीकृत करने और सत्यापित करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे. आधिकारिक तौर पर देश की 16वीं राष्ट्रीय जनगणना- 2027 की जनगणना, 1931 के बाद पहली ऐसी जनगणना होगी जिसमें जाति के आधारित पर व्यापक गणना शामिल होगी और यह देश की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना भी होगी.

अगर कुछ नहीं होता, तब आप कोर्ट आएंगे

CJI ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाने के बाद बताया कि कोर्ट ने भागने के जाए आपको अधिकारियों संपर्क करना चाहिए. उन्हें कुछ मुद्दों पर समझदार बनना चाहिए. CJI ने आगे कहा कि लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि बार के एक मेंबर के रूप में और आपके जैसे कानून की जानकारी रखने वाले व्यक्ति को मुद्दे को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से पहचानना चाहिए और तब अधिकारियों को जागरूक करने की कोशिश करनी चाहिए और अगर कुछ नहीं होता, तब आप कोर्ट आएंगे.’