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Farooq Abdullah on US-Iran Ceasefire: फारूक अब्दुल्ला ने किया अमेरिका-ईरान युद्धविराम का स्वागत, बोले— “जंग बर्बादी है, संवाद से ही आएगी शांति”

अमेरिका-ईरान के बीच हुए दो सप्ताह के अस्थायी युद्धविराम समझौते का जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने का स्वागत किया है. उन्होंने पश्चिम एशिया में जल्द शांति बहाल होने की उम्मीद जताई. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि किसी भी संघर्ष का समाधान केवल बातचीत के जरिए ही संभव है.

बुधवार (8 अप्रैल) को पत्रकारों से बात करते हुए अब्दुल्ला ने कहा, ‘यह अच्छी बात है कि युद्धविराम हो गया है क्योंकि युद्ध कोई समाधान नहीं है, केवल बातचीत ही समाधान है. हमें उम्मीद है कि जब दोनों देश मिलेंगे तो वे मध्यस्थता पर चर्चा करेंगे क्योंकि इस युद्ध ने सभी देशों को प्रभावित किया है’.

‘युद्ध कोई समाधान नहीं है’

इसके आगे उन्होंने कहा ‘मैं अल्लाह का शुक्रगुजार हूं कि दोनों देशों अमेरिका और ईरान को एक साथ बैठकर बात करने की ताकत दी. क्योंकि बातचीत के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है’. उन्होंने कहा कि युद्धविराम के लिए अमेरिका और ईरान को बधाई देते हुए कहा कि युद्ध कोई समाधान नहीं है.

‘इस युद्ध ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया’

पूर्व सीएम ने कहा ‘युद्ध कभी समाधान नहीं रहा है और न कभी होगा. इसलिए मैं और हमारी जनता इन देशों को बधाई देते हैं और आशा करते हैं कि वे बैठकर बातचीत करेंगे. मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि वे शांति की बात करें क्योंकि इस युद्ध ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है’. उन्होंने कहा अगर युद्ध कुछ और समय तक चलता, तो लोगों की मुश्किलें बढ़ जातीं, क्योंकि ऊर्जा स्रोत दुनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और ईश्वर ने इन देशों को ऊर्जा स्रोत दिए हैं.

‘हम चाहते हैं कि युद्ध समाप्त हो’

अब्दुल्ला ने आगे कहा कि ‘हमारे देश के खासतौर पर जम्मू-कश्मीर के कई लोग अरब देशों में काम करते हैं और इस युद्ध ने उनके जीवन को झकझोर दिया है. उन्होंने कहा कि हमें नहीं पता कि शांति स्थापित होने में कितना समय लगेगा, हम वहां काम करने वाले और आजीविका कमाने वाले लोगों की दुर्दशा को लेकर चिंतित हैं. उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि युद्ध समाप्त हो.

‘तनाव कम करने में अपनी भूमिका निभाए’

अब्दुल्ला ने उम्मीद जताई कि भारत दोनों देशों के बीच तनाव कम करने में अपनी भूमिका निभाएगा. उन्होंने कहा ‘मुझे उम्मीद है कि भारत भी मदद करेगा, क्योंकि वह अमेरिका का मित्र है और इसका हम पर भी बहुत बड़ा प्रभाव पड़ेगा.

फिलिस्तीन के मुद्दे पर भारत के रुख पर कही ये बात

उन्होंने आगे कहा कि भारत ने हमेशा फिलिस्तीन के मुद्दे का समर्थन किया है, लेकिन अचानक देश का रुख बदल गया है, जो देश के लिए अच्छा संकेत नहीं है. उन्होंने कहा, ‘हम सदियों से फिलिस्तीन के मुद्दे का समर्थन करते आ रहे थे क्योंकि यह एक न्यायसंगत मुद्दा है. अचानक हमने अपना रुख बदल लिया. यह हमारे राष्ट्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है’.