Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
परिमल नथवाणी का आना महज राजनीति नहीं मानिए क्वांटम प्रयोग में परमाणु उल्टा घूमता देखा गया स्थानीय स्तर पर झड़पों में 25 नागा महिला घायल भूपेंद्र यादव के घऱ जुटे थे टीएमसी के सांसद फिलीपींस के मिंडानाओ में 7.8 तीव्रता का भूकंप Mamata Banerjee Silence: क्या इंडिया गठबंधन में कमजोर हुई ममता की पकड़? प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखीं 'न... टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी छोड़ी Srinagar Crime News: ड्रग तस्करों पर श्रीनगर पुलिस का बड़ा प्रहार; ₹4 करोड़ की अवैध संपत्ति की गई जब्... सीमा पार ड्रग सिंडिकेट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच Delhi Airport News: दिल्ली एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा; तेज हवाओं के कारण एयर इंडिया के 3 विमान क्षतिग्रस्...

न्यायाधिकरण के सवालों का उत्तर नहीं दे पाया चुनाव आयोग

कांग्रेस प्रत्याशी का नाम वोटर लिस्ट में जुड़ा

कोलकाताः पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नामों की व्यापक कटौती के बीच एक महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम सामने आया है। कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टी.एस. शिवगणनम की अध्यक्षता वाले अपलीय न्यायाधिकरण ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार मोताब शेख का नाम मतदाता सूची में बहाल करने का आदेश दिया है। न्यायाधिकरण ने चुनाव आयोग की इस बात के लिए आलोचना की कि वह शेख का नाम हटाने के पीछे कोई ठोस कारण पेश नहीं कर सका।

मोताब शेख, जिन्हें कांग्रेस ने फरक्का निर्वाचन क्षेत्र से अपना उम्मीदवार बनाया है, का नाम विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान न्यायिक विलोपन सूची में डाल दिया गया था। विधानसभा चुनाव लड़ने में असमर्थ होने के कारण उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अपलीय न्यायाधिकरण को निर्देश दिया कि 6 अप्रैल की दोपहर तक इस पर निर्णय लिया जाए। इसी क्रम में 5 अप्रैल को न्यायाधिकरण ने सुनवाई की।

जस्टिस शिवगणनम की अध्यक्षता वाले न्यायाधिकरण ने पाया कि चुनाव आयोग उन आधारों को स्पष्ट करने में विफल रहा जिनके कारण मोताब शेख का नाम हटाया गया था। न्यायाधिकरण ने कहा, चुनाव आयोग वह जानकारी या रिकॉर्ड पेश नहीं कर सका जिसके आधार पर न्यायिक अधिकारी ने नाम हटाने का निर्णय लिया था।

आयोग ने इसके पीछे तकनीकी कारणों का हवाला दिया। अदालत ने पाया कि शेख को जारी किए गए नोटिस में उनके या उनके पिता के नाम की वर्तनी में विसंगति का उल्लेख था, लेकिन पिता के नाम में कोई गलती नहीं थी। नोटिस के अप्रासंगिक हिस्सों को काटा भी नहीं गया था, जिससे भ्रम पैदा हुआ।

अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड की समीक्षा करने के बाद मोताब शेख का नाम तुरंत मतदाता सूची में जोड़ने का आदेश दिया। यह निर्णय उन 27 लाख लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण बनकर आया है जिनके नाम हाल ही में हटाए गए हैं। न्यायाधिकरण का यह रुख दर्शाता है कि चुनाव आयोग द्वारा की गई कटौतियों की न्यायिक समीक्षा संभव है, विशेषकर तब जब प्रशासनिक गलतियों या तकनीकी कारणों से किसी पात्र नागरिक का चुनावी अधिकार छीना जा रहा हो। अब मोताब शेख आधिकारिक तौर पर कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ सकेंगे।