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चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट दोनों की अजीब चुप्पी

बंगाल में 12 फीसद मतदाता हटा दिये गये

  • कुल 91 लाख नाम हटाये गये हैं अब तक

  • अधिकांश मुस्लिम इलाकों में ऐसी स्थिति

  • अब न्यायाधिकरण के आसरे हैं ऐसे लोग

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले मतदाता सूची में एक बड़ा फेरबदल सामने आया है। विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत मंगलवार को 27 लाख से अधिक मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया है। ये वे मतदाता थे जिनके नाम निर्णय प्रक्रिया के अधीन रखे गए थे। इस ताज़ा कटौती के साथ ही अक्टूबर 2025 से अब तक राज्य की मतदाता सूची में कुल 12 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है।

आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2025 में पश्चिम बंगाल में कुल 7.66 करोड़ मतदाता थे, जो अब घटकर 6.75 करोड़ रह गए हैं। यानी पिछले कुछ महीनों में लगभग 91 लाख नाम हटाए जा चुके हैं। तुलनात्मक रूप से देखें तो 2021 के विधानसभा चुनाव में राज्य में 7.34 करोड़ पात्र मतदाता थे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा साझा किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि फरवरी के अंत तक पहले चरण में 63 लाख नाम हटाए गए थे, जिसके बाद 60.06 लाख मतदाताओं को न्यायिक जांच या निर्णय के दायरे में रखा गया था। मंगलवार को इनमें से 45% यानी 27.16 लाख नामों को अंतिम रूप से हटा दिया गया।

इस चुनावी संशोधन का सबसे बड़ा प्रभाव मुस्लिम बहुल जिलों में देखने को मिला है। राज्य में सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाले जिले मुर्शिदाबाद में सर्वाधिक 4.55 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इसके बाद उत्तर 24 परगना का नंबर आता है, जो बांग्लादेश की सीमा से सटा है और जहाँ से सर्वाधिक विधायक चुनकर आते हैं; यहाँ लगभग 3.25 लाख नाम हटाए गए हैं। एक अन्य मुस्लिम बहुल जिले, मालदा में भी 2.39 लाख मतदाताओं को सूची से बाहर कर दिया गया है।

जिन 27 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनके पास अब राज्य भर में स्थापित 19 अपीलीय न्यायाधिकरणों का दरवाजा खटखटाने का विकल्प है। हालांकि, इन न्यायाधिकरणों में भीड़ अभी से जुटने लगी है, लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए इन मतदाताओं के पास मतदान करने का अवसर अब लगभग समाप्त हो चुका है। प्रशासनिक स्तर पर इसे मतदाता सूची को शुद्ध करने की प्रक्रिया बताया जा रहा है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में नामों का कटना राजनीतिक गलियारों में चर्चा और विवाद का विषय बन गया है।