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नंदीग्राम के अधिकांश मुसलमान वोटर लिस्ट में नहीं

चुनाव आयोग की सफाई जमीन पर गलत साबित हो रही

  • 95 फीसद मुस्लिम नाम हटा दिये गये

  • यह एक राजनीतिक एजेंडा के तहत हुआ

  • भाजपा के शुभेंदु अधिकारी का इलाका है यह

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः चुनाव आयोग द्वारा बार बार सफाई दिये जाने के बाद भी इलाकावार जब जांच हो रही है तो सच्चाई कुछ और ही निकलकर आ रही है। इस बार का दायरा बहुचर्चित और राज्य के हॉट सीट समझे जाने वाले नंदीग्राम का है। नंदीग्राम इसलिए भी अधिक चर्चा में रहता है क्योंकि यहीं से ममता ने आंदोलन कर वामपंथी शासन का अंत किया था।

भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के प्रतिनिधित्व वाले पूर्वी मिदनापुर के नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र में एक अध्ययन ने चौंकाने वाली असमानता की ओर इशारा किया है। अध्ययन के अनुसार, निर्वाचन क्षेत्र की कुल मतदाता सूची में मुस्लिमों की हिस्सेदारी और सूची से हटाए गए नामों में इस समुदाय की हिस्सेदारी के बीच जमीन-आसमान का अंतर है। निर्वाचन आयोग ने 23 मार्च को पहली एसआईआर अनुपूरक सूची प्रकाशित की थी। रविवार तक ऐसी दस सूचियाँ जारी की जा चुकी हैं, जिनमें हटाए गए नामों और स्वीकृत मतदाताओं की पहचान की गई है।

नंदीग्राम की इन अनुपूरक सूचियों में कुल 2,826 नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। इनमें से 2,700 नाम मुस्लिम मतदाताओं के हैं, जो कुल हटाए गए नामों का चौंकाने वाला 95.5 प्रतिशत है। गौरतलब है कि 2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान इस निर्वाचन क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 26 फीसद थी। 28 फरवरी को प्रकाशित सूची में नंदीग्राम के 10,500 से अधिक मामलों को विचाराधीन चिह्नित किया गया था।

कोलकाता स्थित शोध संस्थान साबर इंस्टीट्यूट के साबिर अहमद, जो बंगाल में मतदाता सूची संशोधन के पैटर्न का अध्ययन कर रहे हैं, ने कहा: मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाए जाने की यह अत्यधिक दर एसआईआर प्रक्रिया और उसके प्रभाव पर गंभीर सवाल उठाती है। यह विश्लेषण बताता है कि यह प्रक्रिया एक राजनीतिक एजेंडे के तहत की गई है ताकि एक विशेष दल को चुनावी लाभ पहुँचाने के लिए मुस्लिम नामों को हटाया जा सके। इन मतदाताओं के इस बार वोट देने की संभावना कम है क्योंकि अपील प्रक्रिया में समय लगेगा।

यह अभ्यास 27 अक्टूबर, 2025 को शुरू हुआ था जब चुनाव आयोग ने बंगाल सहित नौ राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष संशोधन की घोषणा की थी। बंगाल में 16 दिसंबर को प्रकाशित ड्राफ्ट रोल में 58 लाख से अधिक मतदाताओं को मृत, डुप्लिकेट या अनुपस्थित बताकर बाहर कर दिया गया था। उस समय एएसडीडी सूची में मुस्लिमों की हिस्सेदारी लगभग 33 प्रतिशत थी, जो उनकी कुल जनसंख्या हिस्सेदारी के करीब थी।