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श्रृंगेरी विधान सभा मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट का आदेश

वहां के डाक मतपत्रों के पुनर्सत्यापन का आदेश

  • हार जीत का बहुत सुक्ष्म अंतर

  • पोस्टल बैलेट अमान्य किये गये थे

  • पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होगी

राष्ट्रीय खबर

बेंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ आते हुए, उच्च न्यायालय ने श्रृंगेरी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के 2023 के चुनाव परिणामों की वैधता की जांच करने का निर्णय लिया है। न्यायमूर्ति की पीठ ने एक चुनाव याचिका पर सुनवाई करते हुए विवादित डाक मतपत्रों के पुनर्मत्यापन का सख्त आदेश जारी किया है। यह आदेश उन सीटों पर चुनावी पारदर्शिता के लिए एक मिसाल बन सकता है जहाँ जीत का अंतर बेहद मामूली रहा है।

2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में श्रृंगेरी सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच भीषण राजनीतिक संघर्ष देखा गया था। अंतिम परिणामों में जीत का अंतर इतना कम था कि पराजित उम्मीदवार ने मतगणना प्रक्रिया, विशेषकर डाक मतपत्रों के प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए। याचिकाकर्ता का आरोप है कि बड़ी संख्या में डाक मतपत्रों को बिना किसी ठोस आधार के अमान्य घोषित कर दिया गया था, जिससे चुनाव का अंतिम परिणाम प्रभावित हुआ।

उच्च न्यायालय ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया है कि वह उन सभी डाक मतपत्रों की फाइलें पुनः खोले जिन्हें गिनती के दौरान खारिज कर दिया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया है कि निर्वाचन अधिकारी को स्वयं इस प्रक्रिया की निगरानी करनी होगी। पुनर्मत्यापन के दौरान उन सभी मतपत्रों की जाँच होगी जिन पर मतदान एजेंटों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाएगी और एक विस्तृत रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत को सौंपी जाएगी।

अदालत ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि लोकतंत्र में चुनावी प्रक्रिया की शुचिता और सटीकता सर्वोपरि है। यदि डाक मतपत्रों के पुनर्मत्यापन में कोई बड़ी विसंगति पाई जाती है, तो इसका असर मौजूदा विधायक की सदस्यता पर भी पड़ सकता है। अदालत ने चुनाव आयोग को चेतावनी दी है कि वे अपने स्वयं के दिशा-निर्देशों और हैंडबुक फॉर रिटर्निंग ऑफिसर्स का कड़ाई से पालन करें ताकि भविष्य में चुनावी गणना की निष्पक्षता पर कोई संदेह न रहे। इस आदेश के बाद श्रृंगेरी के मतदाताओं और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।