Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
मध्य प्रदेश में 'ई-प्रवेश' प्रणाली ने बनाया रिकॉर्ड: डॉ. मोहन यादव के विजन से 4.89 लाख छात्रों ने लि... जबलपुर में महिला आरक्षक से पहचान छिपाकर दुष्कर्म और धर्मांतरण का दबाव, एसपी दफ्तर पहुंची पीड़िता “मेरा बेटा राह भर तड़पता रहा...”, मंडला में 108 एंबुलेंस की घोर लापरवाही से 21 साल के युवक की तड़पकर... उज्जैन बनेगी देश की पहली 'सर्प मित्र नगरी': 15 करोड़ की लागत से बनेगा आधुनिक स्नेक पार्क, जानें खूबि... नेपाल में कांवड़ यात्रा से पहले झंडे को लेकर भड़की हिंसा: भारत सीमा से लगे 5 जिलों में कर्फ्यू, सरका... केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: अगले 5 सालों के लिए बढ़ी 'पीएम-किसान' योजना, ₹3.15 लाख करोड़ के बजट को म... भारत में गूगल ने लॉन्च किया Gemini Spark AI एजेंट! आपके बिना ऑनलाइन रहे भी करेगा सारे काम, जानें खास... सावन में करें श्री रुद्राष्टकम स्तोत्र का पाठ: दूर होंगे सभी कष्ट, जानें श्रीराम से जुड़ी कथा, सही स... अर्ली मेनोपॉज और हाई ब्लड प्रेशर का क्या है कनेक्शन? एक्सपर्ट से जानें एस्ट्रोजन हार्मोन का असर और ब... IB अफसर अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत 5 को उम्रकैद, जानें किन पुख्ता सबूतों पर कोर्ट ने सु...

डोनाल्ड ट्रंप ने माना कि हथियार दिये गये थे

ईरान में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों की असली पोल खुली

एजेंसियां

वाशिंगटनः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक सनसनीखेज स्वीकारोक्ति में इस बात की पुष्टि की है कि वाशिंगटन ने दिसंबर और जनवरी के दौरान ईरान में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों और विपक्षी समूहों को हथियार मुहैया कराए थे। फॉक्स न्यूज के संवाददाता ट्रेय यिंगस्ट के साथ रविवार को एक टेलीफोन इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान सरकार को अस्थिर करने और उसे उखाड़ फेंकने के प्रयासों में सीधे तौर पर भूमिका निभाई थी।

यह घटनाक्रम तब सामने आया जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए हमलों (जो 28 फरवरी 2026 से जारी हैं) के बीच युद्ध अपने 38वें दिन में प्रवेश कर चुका है। ट्रंप ने इंटरव्यू में स्पष्ट रूप से कहा, हमने उन्हें बहुत सारी बंदूकें भेजीं। हमने उन्हें कुर्दों के माध्यम से भेजा था। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें लगता है कि कुर्दों ने वे हथियार अपने पास ही रख लिए और वे शायद प्रदर्शनकारियों तक उस तरह नहीं पहुंचे जैसा योजना बनाई गई थी।

ईरान में जनवरी में हुए इन प्रदर्शनों के दौरान सरकारी बलों की कार्रवाई में हजारों लोगों के मारे जाने की खबरें आई थीं। ट्रंप ने पहले इन हमलों का औचित्य यह बताया था कि वह ईरानियों को इस्लामिक गणराज्य के शासन से मुक्त करना चाहते हैं। लेकिन अब उनके इस बयान ने तेहरान के उन दावों को मजबूती दे दी है, जिनमें ईरान लगातार यह कहता रहा है कि ये प्रदर्शन स्वाभाविक नहीं थे, बल्कि विदेशी समर्थित आतंकवादियों द्वारा भड़काए गए थे।

विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के इस बयान से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी और कूटनीतिक जटिलताएं बढ़ सकती हैं। जहां एक ओर मानवाधिकार समूहों ने ईरानी शासन द्वारा 45,000 से अधिक लोगों की कथित हत्या (ट्रंप के दावे के अनुसार) की निंदा की है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका द्वारा एक संप्रभु राष्ट्र में विद्रोह के लिए हथियार भेजने की बात स्वीकार करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन के दायरे में आता है। इस बीच, युद्ध में अब तक 2,000 से अधिक लोगों की मौत और 26,000 से अधिक के घायल होने की पुष्टि हो चुकी है, जिससे मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है।