नीतीश कुमार 30 मार्च को विधान परिषद सदस्य से दे सकते हैं इस्तीफा
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अगले तीन दिन में सीएम पर फैसला
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भाजपा में भी एक नहीं कई दावेदार
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दिल्ली की राजनीति पर टिका फैसला
दीपक नौरंगी
बिहार की राजनीति इस समय एक बड़े ऐतिहासिक बदलाव के मुहाने पर खड़ी है। पिछले एक महीने से राज्य में जारी अनिश्चितता और सियासी सरगर्मियां अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच गई हैं। सूत्रों के हवाले से यह प्रबल संभावना जताई जा रही है कि अगले 72 घंटों के भीतर बिहार को एक कार्यवाहक मुख्यमंत्री मिल सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं। चर्चा है कि वे सक्रिय राज्य की राजनीति से अब दूरी बना रहे हैं और राष्ट्रीय भूमिका की ओर अग्रसर हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि वे राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं और 30 मार्च तक विधान परिषद से इस्तीफा दे सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह बिहार के सत्ता समीकरणों में एक युग के अंत जैसा होगा।
नीतीश कुमार के संभावित विकल्प के तौर पर वर्तमान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा के नाम सबसे आगे चल रहे हैं। सम्राट चौधरी की संगठन और सरकार दोनों पर मजबूत पकड़ मानी जाती है, वहीं विजय कुमार सिन्हा को विधायकों के बीच एक स्वीकार्य और संतुलित चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व इन दोनों नामों पर गंभीरता से विचार कर रहा है, ताकि राज्य में प्रशासनिक स्थिरता बनी रहे।
दिल्ली में इस बदलाव को लेकर हलचल तेज है। केंद्र सरकार न केवल बिहार की स्थिरता बल्कि पड़ोसी राज्य बंगाल के चुनावों और आगामी राष्ट्रीय रणनीति को ध्यान में रखकर कदम उठा रही है। माना जा रहा है कि कार्यवाहक मुख्यमंत्री की नियुक्ति महज एक अस्थायी व्यवस्था नहीं होगी, बल्कि यह भविष्य की राजनीति की नई दिशा भी तय करेगी।
पिछले कुछ समय से बिहार प्रशासन में दिख रहा धीमापन और गठबंधन के भीतर बढ़ते मतभेदों ने इस बदलाव के संकेत पहले ही दे दिए थे। यदि नीतीश कुमार औपचारिक रूप से पद छोड़ते हैं, तो राज्य में न केवल नया नेतृत्व आएगा, बल्कि बड़े पैमाने पर प्रशासनिक और कैबिनेट फेरबदल की भी संभावना है। फिलहाल, सभी की निगाहें दिल्ली के अंतिम फैसले और पटना की अगली सियासी चाल पर टिकी हैं। आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन बिहार की सत्ता का समीकरण बदलने की जमीन पूरी तरह तैयार हो चुकी है।