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किसान के प्रतिशोध की आग में थमी बाघिन की साँसें

जहर देकर चार साल की बाघिन को मार डाला

  • सतपुड़ा टाईगर रिजर्व की घटना प्रकाश में

  • बदले की खौफनाक पटकथा तैयार की थी

  • बैल के शव पर ही यूरिया छिड़क दिया था

राष्ट्रीय खबर

छिंदवाड़ा: मध्यप्रदेश के वन्यजीव गलियारों से एक ऐसी खबर आई है जिसने न केवल पर्यावरण प्रेमियों को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते हिंसक संघर्ष की भयावह तस्वीर भी पेश की है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के देलाखेड़ी क्षेत्र में एक महज 4 वर्षीय बाघिन की बेरहमी से हत्या कर दी गई। चौंकाने वाली बात यह है कि इस राजसी जीव को किसी हथियार से नहीं, बल्कि खेती में इस्तेमाल होने वाले ‘यूरिया’ को जहर बनाकर मौत की नींद सुलाया गया।

इस पूरी घटना की शुरुआत दो दिन पहले हुई, जब बाघिन ने सांगा खेड़ा गांव के एक किसान के बैल का शिकार किया था। अपने मवेशी को खोने के गम और आर्थिक नुकसान से उपजे गुस्से में किसान ने कानून हाथ में लेने का फैसला किया। डीएफओ साहिल गर्ग के अनुसार, आरोपी किसान ने मृत बैल के अवशेषों पर भारी मात्रा में यूरिया छिड़क दिया। जब बाघिन अपने शिकार को दोबारा खाने के लिए लौटी, तो यूरिया के जहरीले प्रभाव के कारण उसके प्राण-पखेरू उड़ गए। अपनी करतूत को छिपाने के लिए आरोपियों ने बाघिन के शव को पास के ही एक गड्ढे में दफन कर साक्ष्य मिटाने की कोशिश की।

वन विभाग की हाई-टेक निगरानी प्रणाली भी इस घटना में सवालों के घेरे में है। बाघिन के गले में रेडियो कॉलर लगा हुआ था, जिसके सिग्नल दो दिन पहले ही बंद हो गए थे। बावजूद इसके, विभाग की टीम को उसे खोजने और जमीन में दफन शव तक पहुँचने में लंबा समय लगा। वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने इसे मॉनिटरिंग की स्पष्ट विफलता बताते हुए अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

मध्यप्रदेश, जिसे ‘टाइगर स्टेट’ का दर्जा प्राप्त है, वहां पिछले 15 महीनों में 64 बाघों की मौत हो चुकी है। चिंताजनक तथ्य यह है कि इनमें से 25% मौतों का कारण करंट या जहर देना पाया गया है। हालांकि सरकार की नीति के तहत मवेशियों के शिकार पर तत्काल मुआवजे का प्रावधान है, लेकिन जमीनी स्तर पर जागरूकता की कमी और मुआवजे की प्रक्रिया में देरी अक्सर किसानों को ऐसे आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मुआवजे से काम नहीं चलेगा, बल्कि संवेदनशील क्षेत्रों में ग्रामीणों के साथ संवाद और फील्ड डायरेक्टर स्तर पर कड़ी जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी।