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चीन को तियानमेन का सच स्वीकार करना चाहिए

ताइवान और अमेरिका की तरफ से मौके पर आया बयान

एजेंसियां

ताइपे: ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने गुरुवार को बीजिंग के तियानमेन स्क्वायर में 37 साल पहले हुई घटना की बरसी पर कहा कि चीन को उस दिन जो हुआ, उसके सच को स्वीकार करना चाहिए। बीजिंग इस घटना को एक वर्जित विषय मानता है। लाई ने अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट में लिखा, मैं ईमानदारी से आशा करता हूं कि चीन 37 साल पहले हुई 4 जून की घटना का सामना कर सके, सच्चाई को स्वीकार कर सके, लोगों के दर्द को कम कर सके और सुलह तथा बातचीत के दरवाजे खोल सके।

दूसरी तरफ बीजिंग के दमन के विरोध में, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को कहा कि चीन का सेंसरशिप 1989 में तियानमेन स्क्वायर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किए गए सैन्य हमले की यादों को नहीं मिटा सकता। रुबियो का यह बयान इस मामले पर उनकी पुरानी टिप्पणियों के अनुरूप है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपने संबंधों की बार-बार प्रशंसा की है, जिनसे वे पिछले महीने बीजिंग में मिले थे।

मानवाधिकार समूहों के अनुसार, चीनी सैनिकों ने तियानमेन स्क्वायर में लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई थीं, जिसमें सैकड़ों या हजारों लोगों की मौत हो गई थी। रुबियो ने अपने बयान में कहा, 4 जून को दुनिया चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा तियानमेन स्क्वायर और उसके आसपास हजारों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हमला करने के आदेश के 37 साल पूरे होने का स्मरण करती है। उन्होंने आगे कहा, सेंसरशिप की कोई भी मात्रा अतीत को नहीं मिटा सकती। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा के अपने अधिकारों को बनाए रखने के लिए जिन लोगों ने बलिदान दिया, उन्हें एक दिन न्याय जरूर मिलेगा।

चीन में तियानमेन स्क्वायर की कार्रवाई का कोई भी उल्लेख वर्जित है और इस विषय को अत्यधिक सेंसर किया जाता है। उस समय चीन ने इस अशांति का दोष कम्युनिस्ट पार्टी को उखाड़ फेंकने की कोशिश कर रहे प्रतिक्रांतिकारियों पर मढ़ दिया था और आज तक कभी भी मृतकों की आधिकारिक और पूर्ण संख्या प्रदान नहीं की है। हॉन्गकॉन्ग में लगे प्रतिबंधों ने उन आयोजनों को समाप्त कर दिया है जो कभी इस बरसी पर सबसे बड़ी शोक सभा के रूप में होते थे। अब लंदन, न्यूयॉर्क, बर्लिन और ताइपे जैसे शहर 4 जून की इस बरसी को याद करने के लिए मशाल जला रहे हैं।