Breaking News in Hindi

ईसाई निकायों के प्रतिनिधिमंडल से मिले केंद्रीय गृह मंत्री

सदन में अनुपस्थित रहने के बाद भी काम काज में भागीदारी

एफसीआरए संशोधन पर उन्हें आश्वस्त किया

यह विधेयक पूरी तरह धर्म निरपेक्ष नियम है

दो प्रतिनिधिमंडलों से आज हुई मुलाकात

राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (एफसीआरए) को लेकर विभिन्न ईसाई निकायों और धार्मिक संगठनों द्वारा लगातार चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। इन तमाम आशंकाओं को दूर करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में दो महत्वपूर्ण प्रतिनिधिमंडलों के साथ उच्च-स्तरीय बैठक की।

इनमें से एक प्रतिनिधिमंडल विशेष रूप से देश के सभी प्रमुख ईसाई संप्रदायों और समुदायों का प्रतिनिधित्व कर रहा था। इस दौरान गृह मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में आश्वासन दिया कि प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक पूरी तरह से धर्म-निरपेक्ष है और इसका उद्देश्य किसी भी विशेष समुदाय या धार्मिक संस्था के कामकाज को अनुचित रूप से प्रभावित करना नहीं है, बल्कि वित्तीय पारदर्शिता को सुनिश्चित करना है।

गौरतलब है कि इन दिनों संसद के मानसून सत्र में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। एक तरफ जहां संसद के दोनों सदनों में विपक्षी दल पिछले महीने हुए छात्र प्रदर्शनों और कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह की सदन में अनुपस्थिति को लेकर लगातार तीखा विरोध जता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ गृह मंत्री ने इन तमाम राजनीतिक हंगामों के बीच नीतिगत और प्रशासनिक संवाद को प्राथमिकता दी है।

संसद सत्र के दौरान विपक्षी नेताओं द्वारा यह आरोप लगाया जा रहा था कि गृह मंत्री दोनों सदनों में सवालों के जवाब देने से बच रहे हैं और उनकी गैरमौजूदगी से सदन की कार्यवाही बाधित हो रही है। विपक्षी सांसदों ने यहां तक सवाल उठाया कि गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार सदन के प्रति जवाबदेह होने में आनाकानी कर रही है।

हालांकि, इन राजनीतिक गहमागहमी और सदन के बाहर-भीतर चल रहे विरोध के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने ईसाई प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर यह संदेश देने का प्रयास किया है कि सरकार हर वर्ग की चिंताओं को सुनने और उनका समाधान करने के लिए पूरी तरह तत्पर है।

बैठक में मौजूद धार्मिक प्रतिनिधियों ने विदेशी फंडिंग के नियमों और उसके अनुपालन से जुड़ी व्यावहारिक कठिनाइयों को गृह मंत्री के समक्ष रखा। इस पर गृह मंत्री ने उन्हें विश्वास दिलाया कि नए विधेयक के प्रावधानों से किसी भी ईमानदार और पारदर्शी संगठन को डरने की आवश्यकता नहीं है। सरकार का यह कदम अल्पसंख्यकों में विश्वास बहाली और कानून को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है, जो संसद के आगामी दिनों में होने वाली बहसों और विधायी कामकाज को भी प्रभावित कर सकता है।