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मोदी जी खायेंगे तो मैं बनाकर भेज दूंगीः ममता बनर्जी

झालमुडी और मछली पर भी भाजपा पर जोरदार हमला

  • कई भाजपा नेता नजर आये थे

  • झालमुड़ी इंटरनेट पर सुपरहिट हुआ

  • बातचीज में प्याज का उल्लेख भी हुआ

राष्ट्रीय खबर

बैरकपुरः पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के प्रचार अभियान में बंगाल की खाद्य संस्कृति—मछली और झालमुड़ी—अब राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का केंद्र बन गई है। तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर उस समय और तेज हो गया जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक दिलचस्प टिप्पणी की।

ममता बनर्जी ने मंगलवार को एक चुनावी जनसभा में कहा कि यदि प्रधानमंत्री मछली खाना चाहते हैं, तो मैं खुद उनके लिए मछली पकाऊंगी। यह बयान टीएमसी के उन आरोपों के बीच आया है जिसमें कहा गया था कि यदि भाजपा सत्ता में आती है, तो वह राज्य में मछली, मांस और अंडे खाने पर प्रतिबंध लगा देगी।

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को झाड़ग्राम में अपने चुनावी दौरे के दौरान अचानक एक साधारण सड़क किनारे की दुकान पर रुककर झालमुड़ी का लुत्फ उठाया। तीखी मिर्च और मसालों से बनी इस बंगाली स्ट्रीट फूड को खाते हुए प्रधानमंत्री की तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरीं। हालांकि, ममता बनर्जी ने इसे नाटक करार देते हुए तंज कसा कि यह केवल दिखावा था और वह झालमुड़ी दुकानदार ने नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात एसपीजी ने तैयार की होगी। वरना दुकानदार की दुकान के अंदर कैमरे किसने लगाये थे।

इसके जवाब में भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह कदम छोटे व्यापारियों के प्रति उनके जुड़ाव को दर्शाता है और उन्होंने सवाल किया कि क्या मुख्यमंत्री ने पिछले 15 वर्षों में कभी ऐसा प्रयास किया है।

खाद्य सामग्री पर शुरू हुई इस बहस में भाजपा नेताओं ने टीएमसी के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है कि वे खान-पान की आदतों पर कोई प्रतिबंध लगाएंगे। भाजपा ने स्पष्ट किया कि बंगाल के लोग अपनी पसंद का भोजन करने के लिए स्वतंत्र हैं। वहीं, ममता बनर्जी ने अपनी रैलियों में लक्ष्मी भंडार योजना का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया।

उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने महिलाओं के लिए भत्ते को बढ़ाकर 1,500 रुपये कर दिया है। उन्होंने भाजपा की मातृ शक्ति योजना (जिसमें 3,000 रुपये प्रति माह का वादा किया गया है) पर कटाक्ष करते हुए पूछा कि यदि भाजपा वास्तव में महिलाओं की हितैषी है, तो केंद्र सरकार ने देशभर की महिलाओं के लिए ऐसा कदम क्यों नहीं उठाया।

चुनाव प्रचार के अंतिम चरणों में मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग उन्हें राज्य सरकार के कर्मचारियों को चार प्रतिशत महंगाई भत्ता देने की अनुमति नहीं दे रहा है, जिसकी घोषणा उन्होंने चुनाव की तारीखों के ऐलान से ठीक पहले की थी। जैसे-जैसे मतदान की तारीख करीब आ रही है, बंगाल की राजनीति में सोनार बांग्ला के वादों के साथ-साथ थाली की राजनीति भी चरम पर पहुंच गई है।