Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
EVM में टोटलाइजर से क्यों नहीं हो सकती वोटों की गिनती?: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से मां... किशनगंज: खकवा नदी के तेज बहाव में तैरकर जनाजा ले जाने की मजबूरी, ग्रामीणों ने डीएम और बिहार सरकार से... शिवपुरी में रहस्यमयी बीमारी का कहर: 10 दिनों में एक ही परिवार के 4 बच्चों की मौत, डेंगू-मलेरिया निगे... भारतीय मुसलमानों के अधिकारों के लिए 51 सदस्यीय राष्ट्रीय निगरानी समिति का गठन: नई दिल्ली में ऐलान अफगानिस्तान टी20 सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान: श्रेयस अय्यर बने कप्तान, युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी... 'सैयारा' फेम अनीत पड्डा की नई सीरीज 'हुंकार: द रोर' का टीजर रिलीज: जानें कहानी, स्टार कास्ट और OTT र... नेपाल में 180 km/h की रफ्तार से आई 'हिमालयी सुनामी': रसुवा-धाडिंग में भारी तबाही, सुरंगों में बचाव क... LIC के दो नए धमाकेदार प्लान: गारंटीड सेविंग्स के साथ मिलेगा प्योर लाइफ कवर, 7 सितंबर से शुरू होगी बि... UPI का नया रिकॉर्ड: अगस्त में ₹29.82 लाख करोड़ का लेनदेन, कुल 2,451 करोड़ ट्रांजेक्शन दर्ज; NPCI ने ... श्रीकृष्ण के सबसे प्रिय भोग माखन-मिश्री और पंचामृत की विधि; जानें मलाई से शुद्ध माखन बनाने का आसान न...

फिर से लोगों के बचाव में देवदूत बनी भारतीय सेना

सिक्किम में अचानक भारी बर्फबारी

  • मंदाकिनी झरने के पास मौसम बिगड़ा

  • सड़क बंद होने से दोनों तरफ लोग फंसे

  • भीषण ठंड के बीच लोगों को निकाला गया

राष्ट्रीय खबर

सिलिगुड़ीः हिमालय की गोद में बसा सिक्किम अपनी अलौकिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, लेकिन पहाड़ का यही सौंदर्य कब रौद्र रूप धारण कर ले, इसका अंदाजा लगाना कठिन है। पूर्वी सिक्किम की यात्रा पर गए सैकड़ों पर्यटकों को मंगलवार को इस सच्चाई का सामना करना पड़ा। जवाहरलाल नेहरू रोड पर मंदाकिनी झरने के पास अचानक हुई भारी बर्फबारी ने जनजीवन को पूरी तरह ठप कर दिया। देखते ही देखते सड़कें सफेद चादर से ढक गईं, जिससे यातायात ठप हो गया और पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय बुजुर्ग भी भीषण ठंड और बर्फ के बीच फंस गए।

ऐसी विषम परिस्थितियों में जब पर्यटकों की सांसें अटकने लगी थीं, तब भारतीय सेना के जवान एक बार फिर असली हीरो बनकर सामने आए। हाड़ कंपा देने वाली ठंड और शून्य से नीचे गिरते तापमान के बीच सेना ने तत्काल बचाव अभियान शुरू किया। इस राहत कार्य में सीमा सड़क संगठन, सिक्किम पुलिस और स्थानीय निवासियों ने भी सेना का भरपूर साथ दिया।

युद्धस्तर पर शुरू किए गए इस अभियान के तहत, संयुक्त बचाव दल ने न केवल फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया, बल्कि उनका हौसला भी बढ़ाया। भारी मशीनरी और मानव बल की सहायता से सड़क पर जमी बर्फ को हटाया गया। कड़ी मशक्कत के बाद लगभग 90 से 100 फंसे हुए वाहनों को सुरक्षित निकाला जा सका।

सेना के जवानों ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी पर्यटक चिकित्सा सहायता या भोजन-पानी के बिना न रहे। प्रतिकूल मौसम की परवाह किए बिना की गई इस त्वरित कार्रवाई ने एक बड़ी आपदा को टाल दिया। बर्फ साफ होने के बाद यातायात को पुन: बहाल कर दिया गया, जिससे पर्यटकों ने राहत की सांस ली। सिक्किम के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में अचानक मौसम बदलना एक बड़ी चुनौती है, विशेषकर उन पर्यटकों के लिए जो मैदानी इलाकों से आते हैं। इस घटना ने एक बार फिर नागरिक प्रशासन और सेना के बीच बेहतरीन समन्वय को प्रदर्शित किया है। भारतीय सेना न केवल सीमाओं की रक्षा करती है, बल्कि दुर्गम क्षेत्रों में संकट के समय नागरिकों के लिए एकमात्र सहारा बनती है।