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फिर से लोगों के बचाव में देवदूत बनी भारतीय सेना

सिक्किम में अचानक भारी बर्फबारी

  • मंदाकिनी झरने के पास मौसम बिगड़ा

  • सड़क बंद होने से दोनों तरफ लोग फंसे

  • भीषण ठंड के बीच लोगों को निकाला गया

राष्ट्रीय खबर

सिलिगुड़ीः हिमालय की गोद में बसा सिक्किम अपनी अलौकिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, लेकिन पहाड़ का यही सौंदर्य कब रौद्र रूप धारण कर ले, इसका अंदाजा लगाना कठिन है। पूर्वी सिक्किम की यात्रा पर गए सैकड़ों पर्यटकों को मंगलवार को इस सच्चाई का सामना करना पड़ा। जवाहरलाल नेहरू रोड पर मंदाकिनी झरने के पास अचानक हुई भारी बर्फबारी ने जनजीवन को पूरी तरह ठप कर दिया। देखते ही देखते सड़कें सफेद चादर से ढक गईं, जिससे यातायात ठप हो गया और पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय बुजुर्ग भी भीषण ठंड और बर्फ के बीच फंस गए।

ऐसी विषम परिस्थितियों में जब पर्यटकों की सांसें अटकने लगी थीं, तब भारतीय सेना के जवान एक बार फिर असली हीरो बनकर सामने आए। हाड़ कंपा देने वाली ठंड और शून्य से नीचे गिरते तापमान के बीच सेना ने तत्काल बचाव अभियान शुरू किया। इस राहत कार्य में सीमा सड़क संगठन, सिक्किम पुलिस और स्थानीय निवासियों ने भी सेना का भरपूर साथ दिया।

युद्धस्तर पर शुरू किए गए इस अभियान के तहत, संयुक्त बचाव दल ने न केवल फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया, बल्कि उनका हौसला भी बढ़ाया। भारी मशीनरी और मानव बल की सहायता से सड़क पर जमी बर्फ को हटाया गया। कड़ी मशक्कत के बाद लगभग 90 से 100 फंसे हुए वाहनों को सुरक्षित निकाला जा सका।

सेना के जवानों ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी पर्यटक चिकित्सा सहायता या भोजन-पानी के बिना न रहे। प्रतिकूल मौसम की परवाह किए बिना की गई इस त्वरित कार्रवाई ने एक बड़ी आपदा को टाल दिया। बर्फ साफ होने के बाद यातायात को पुन: बहाल कर दिया गया, जिससे पर्यटकों ने राहत की सांस ली। सिक्किम के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में अचानक मौसम बदलना एक बड़ी चुनौती है, विशेषकर उन पर्यटकों के लिए जो मैदानी इलाकों से आते हैं। इस घटना ने एक बार फिर नागरिक प्रशासन और सेना के बीच बेहतरीन समन्वय को प्रदर्शित किया है। भारतीय सेना न केवल सीमाओं की रक्षा करती है, बल्कि दुर्गम क्षेत्रों में संकट के समय नागरिकों के लिए एकमात्र सहारा बनती है।