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महुआ मोइत्रा के खिलाफ चार्जशीट पर रोक

पैसे लेकर सवाल पूछने के मामले में नया आदेश

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः पश्चिम बंगाल की कृष्णनगर सीट से तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा को पैसे के बदले सवाल मामले में एक बड़ी राहत मिली है। भारत के उच्चतम न्यायालय ने महुआ मोइत्रा के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा आरोप पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। शुक्रवार को न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश के एक हिस्से पर रोक लगा दी, जिसमें लोकपाल को आरोप पत्र दाखिल करने के संबंध में पुनर्विचार करने की अनुमति दी गई थी।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि महुआ मोइत्रा ने व्यवसायी दर्शन हिरानंदानी से महंगे उपहार और नकद राशि लेकर संसद में उद्योगपति गौतम अडानी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने वाले सवाल पूछे थे। इन आरोपों के बाद, लोकपाल ने मामले की जांच के आदेश दिए और पिछले साल नवंबर में सीबीआई को आरोप पत्र दाखिल करने की अनुमति दे दी थी।

महुआ मोइत्रा ने लोकपाल के इस निर्देश को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने शुरू में उनकी याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन बाद में कानूनी त्रुटियों का हवाला देते हुए लोकपाल के पुराने आदेश को रद्द कर दिया और चार सप्ताह के भीतर नए सिरे से विचार करने को कहा था। अब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उसी फैसले के उस हिस्से पर रोक लगा दी है जो लोकपाल को इस मामले में आगे बढ़ने की शक्ति देता था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में शिकायतकर्ता निशिकांत दुबे, सीबीआई और खुद महुआ मोइत्रा को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने विशेष रूप से लोकपाल अधिनियम की धारा 20 और दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के पैराग्राफ 89 पर ध्यान केंद्रित किया है। कोर्ट का मानना है कि इस मामले में कानूनी प्रक्रियाओं का पालन सूक्ष्मता से होना अनिवार्य है।

उल्लेखनीय है कि इसी विवाद के चलते आचार समिति की सिफारिश पर 8 दिसंबर 2023 को महुआ मोइत्रा की संसद सदस्यता रद्द कर दी गई थी। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में वह दोबारा कृष्णनगर से जीतकर सदन में वापस आईं। सीबीआई का दावा है कि मोइत्रा ने कुल 61 सवाल पूछे थे, जिनमें से कई दर्शन हिरानंदानी द्वारा उनके लॉगिन क्रेडेंशियल का उपयोग करके सीधे पोस्ट किए गए थे। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के इस रुख ने जांच एजेंसी की अगली कार्रवाई पर ब्रेक लगा दिया है।