Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
नागपंचमी पर आस्था का महासैलाब: नागलवाड़ी भिलट देव में 4 लाख भक्तों ने टेका मत्था; महाकाल पहुंचे क्रि... निकाय चुनाव के लिए कांग्रेस ने कसी कमर: भोपाल से शुरू हुआ 'बेहतर सिटी अभियान', वार्ड-वार्ड जाकर उठाए... सड़क हादसे के बाद AIIMS भोपाल में युवक हुआ ब्रेन-डेड, परिजनों ने लिया अंगदान का फैसला छिंदवाड़ा में खाद वितरण पर लगी अंतरिम रोक: धांधली के आरोपों के बीच किसानों का चक्काजाम, स्टॉक सत्याप... छिंदवाड़ा: सावन-भादों में पलाश के पत्तों से जीवंत हो रही सदियों पुरानी परंपरा, आजीविका और आस्था का अ... श्योपुर के रघुनाथपुर में स्कूल की छत भरभराकर गिरी, शाम का समय होने से टला बड़ा हादसा ग्वालियर SP ऑफिस में कांग्रेस जिला महामंत्री राजेश किरार ने खाया जहर, अस्पताल में मौत; सुसाइड नोट मे... हथियार ढूंढने गई थी पुलिस, अलमारी से निकला 3 करोड़ रुपयों का अंबार; नोट गिनने के लिए मंगवानी पड़ी मश... उज्जैन नागचंद्रेश्वर मंदिर में करंट की अफवाह से मची भगदड़: बैरिकेडिंग टूटने से कई श्रद्धालु घायल, चर... एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा केस में CBI की 636 पेज की चार्जशीट, पति समर्थ और सास पर दहेज हत्या का केस

अब सुप्रीम कोर्ट इसमें ए आई का प्रयोग करेगा

केस लिस्टिंग में बार बार गड़बड़ी की शिकायत के बाद कार्रवाई

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारतीय न्यायपालिका के प्रशासनिक ढांचे में एक युगांतकारी परिवर्तन होने जा रहा है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मुकदमों की लिस्टिंग (सूचीबद्ध करने) और जजों की बेंच के आवंटन की प्रक्रिया से मानवीय हस्तक्षेप को पूरी तरह समाप्त करने का निर्णय लिया है। अब यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सॉफ्टवेयर संभालेगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत द्वारा लिया गया यह निर्णय शीर्ष अदालत की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश मास्टर ऑफ रोस्टर होते हैं, जिनके पास यह तय करने का विशेषाधिकार होता है कि कौन सा मामला किस बेंच के पास जाएगा। इस शक्ति को लेकर अक्सर विवाद और आलोचनाएं होती रही हैं, क्योंकि इसमें मानवीय विवेक और संभावित पक्षपात की गुंजाइश बनी रहती थी। एआई के आगमन के साथ, मुकदमों का वितरण अब एल्गोरिदम और निर्धारित मानकों के आधार पर होगा, जिससे किसी भी प्रकार के अनुचित प्रभाव या प्रशासनिक हेरफेर की संभावना खत्म हो जाएगी।

सूत्रों के अनुसार, यह सुधार एक आंतरिक जांच के बाद लागू किया जा रहा है, जिसमें रजिस्ट्री के भीतर दो बड़ी प्रणालीगत विफलताओं का पता चला था। पहली विफलता उन अधिकारियों से संबंधित थी जो लंबे समय से एक ही पद पर जमे हुए थे  और दूसरी समस्या पुराना तकनीकी बुनियादी ढांचा था। पुराने तंत्र का फायदा उठाकर रजिस्ट्री में अक्सर अनियमित तरीके से केस आवंटित किए जा रहे थे। इन खामियों को दूर करने के लिए हाल ही में रजिस्ट्री अधिकारियों के बड़े पैमाने पर अंतर-विभागीय तबादले भी किए गए हैं, और इस महीने के अंत तक तबादलों का दूसरा दौर भी अपेक्षित है।

इस बड़े बदलाव की तत्काल वजह मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ के समक्ष हुई एक सुनवाई बनी। मामला इरफान सोलंकी की याचिका से जुड़ा था, जिसमें उत्तर प्रदेश गैंगस्टर अधिनियम को भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के साथ विरोधाभासी होने के आधार पर चुनौती दी गई थी। इस सुनवाई के दौरान केस लिस्टिंग में हुई एक गंभीर चूक सामने आई, जिसने सीजेआई को पूरी प्रणाली को तकनीक-आधारित और मानव-रहित बनाने के लिए प्रेरित किया। यह कदम न केवल अदालती कार्यवाही में तेजी लाएगा, बल्कि न्यायपालिका की विश्वसनीयता को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, जहां तकनीक न्याय वितरण की निष्पक्षता सुनिश्चित करेगी।