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राष्ट्रपति के आमंत्रण को टीएमसी ने ठुकराया

उत्तर बंगाल से प्रारंभ हुआ विवाद अब भी जारी है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारत की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू और पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के बीच चल रहा गतिरोध अब एक नए स्तर पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति द्वारा आगामी सोमवार को राष्ट्रपति भवन में सभी राजनीतिक दलों के सांसदों के लिए आयोजित ब्रेकफास्ट के निमंत्रण को तृणमूल कांग्रेस ने औपचारिक रूप से ठुकरा दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर पहले से ही तनातनी बनी हुई है।

राष्ट्रपति भवन के सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति मुर्मू ने सोमवार सुबह सभी दलों के सांसदों के साथ एक अनौपचारिक मुलाकात और जलपान का कार्यक्रम रखा था। इसका उद्देश्य सांसदों के साथ सीधा संवाद स्थापित करना था। हालांकि, राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के मुख्य सचेतक नादिमुल हक ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी के सांसद इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे।

तृणमूल कांग्रेस ने इस फैसले के पीछे रमजान के पवित्र महीने का हवाला दिया है। पार्टी का कहना है कि वर्तमान में रमजान का समय चल रहा है और देश का मुस्लिम समुदाय दिन भर रोजा रखता है। ऐसे समय में सार्वजनिक रूप से जलपान के कार्यक्रम में शामिल होना समुदाय की भावनाओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुकूल नहीं होगा। टीएमसी ने तर्क दिया है कि वे अपने निर्वाचन क्षेत्रों और देश के बड़े अल्पसंख्यक वर्ग की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए इस निमंत्रण को स्वीकार नहीं कर सकते।

यह केवल एक निमंत्रण ठुकराने का मामला नहीं है, बल्कि पिछले कुछ दिनों से चल रहे घटनाक्रमों की एक कड़ी है। इससे ठीक एक दिन पहले, तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा था। वे पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा आदिवासी समाज के कल्याण के लिए किए गए कार्यों का विवरण (खतियान) उन्हें सौंपना चाहते थे। हालांकि, राष्ट्रपति भवन की ओर से इस मुलाकात के आवेदन को खारिज कर दिया गया था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी का यह ताजा कदम राष्ट्रपति भवन द्वारा पिछले आवेदन को ठुकराए जाने की प्रतिक्रिया भी हो सकता है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में आदिवासी और अल्पसंख्यक दोनों ही वोट बैंक काफी महत्वपूर्ण हैं, और ममता बनर्जी की पार्टी इन दोनों ही मोर्चों पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखना चाहती है। फिलहाल, राष्ट्रपति के निमंत्रण पर टीएमसी की यह अनुपस्थिति दिल्ली के गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।