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राष्ट्रीय उद्यान में विलुप्त पक्षी प्रजाति को बचाने की कवायद

वहां पैदा हुए दोनों गोडावण को छोड़ा गया

विलुप्ति से बचाने की कवायद जारी

देश में सिर्फ 150 गोडावण ही बचे हैं

केंद्र में अभी और 98 पक्षी बढ़ रहे हैं

राष्ट्रीय खबर

जयपुरः राज्य के राष्ट्रीय उद्यान में बंदी गृह में पाले गए दो महान भारतीय गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) छोड़े गए हैं। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों ने रविवार सुबह राजस्थान के मरुस्थल राष्ट्रीय उद्यान में दो नर महान भारतीय गोडावण को खुले में छोड़ा। यह प्रोजेक्ट जीआईबी के तहत जैसलमेर के रामदेवरा और सम स्थित दो संरक्षण प्रजनन केंद्रों में पाले गए गोडावणों को दोबारा जंगल में बसाने (रीवाइल्डिंग) की दिशा में पहला कदम है।

अत्यंत संकटग्रस्त इस पक्षी की लंबी अवधि की रिकवरी के लिए यह परियोजना लागू की जा रही है। वर्तमान में जंगल में केवल लगभग 150 गोडावण ही बचे हैं। इस अवसर पर राजस्थान के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री संजय शर्मा भी उपस्थित थे। भूपेंद्र यादव ने एक्स पर लिखा कि वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लगभग एक दशक के समर्पण के कारण यह ऐतिहासिक सफलता संभव हो पाई है, जिससे गोडावण एक बार फिर राजस्थान के रेगिस्तानों में लौट सकेंगे।

इन संरक्षण प्रजनन केंद्रों की स्थापना गोडावणों की एक मूल आबादी तैयार करने के लिए की गई थी। 2019 से, जंगली अंडों को कृत्रिम रूप से सेया गया और चूजों को पाला गया। बाद में इन पक्षियों ने बंदी अवस्था में प्रजनन किया। वर्तमान में इन सुविधाओं में ऐसे 98 पक्षी हैं, जिनमें से 11 को जंगल में छोड़ने के लिए चिन्हित किया गया था। इनमें से दो पक्षियों को रविवार को मरुस्थल राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा गया।

पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि बंदी गृह में पले-बढ़े गोडावणों को छोड़ना प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम में अगला महत्वपूर्ण कदम है। श्री यादव ने कहा कि गोडावण घास के मैदानों के संरक्षण और भूमि क्षरण तटस्थता के लिए महत्वपूर्ण है। इस परियोजना में कैप्टिव ब्रीडिंग के अलावा राजस्थान वन विभाग द्वारा लगभग 200 वर्ग किलोमीटर के बाड़ वाले घास के मैदानों का निर्माण करके आवास सुधार भी शामिल है।