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युद्ध के असर से प्रभावित भारत का ऊर्जा भंडार

एलएनजी भंडारण की दिशा में बढ़ते कदम

  • आपूर्ति का गणित और वर्तमान संकट

  • दस फीसद बफर स्टॉक का सुझाव था

  • अब दीर्घकालीन योजना पर काम प्रारंभ

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण उत्पन्न आपूर्ति बाधाओं ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। हालिया वैश्विक उथल-पुथल को देखते हुए, भारत सरकार अब घरेलू स्तर पर तरल प्राकृतिक गैस के रणनीतिक भंडार विकसित करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। नीति निर्माता मौजूदा एलएनजी आयात टर्मिनलों पर भंडारण क्षमता विस्तार की संभावनाओं को खंगाल रहे हैं।

आंकड़ों के अनुसार, भारत की कुल प्राकृतिक गैस खपत लगभग 189 मिलियन मेट्रिक्स स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन है। इसमें से करीब 97.5 का उत्पादन घरेलू स्तर पर होता है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने मंगलवार को जानकारी दी कि फोर्स मेज्योर स्थितियों के कारण लगभग 47.4 क्यूबिक मीटर प्रतिदिन की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

इस तात्कालिक संकट से निपटने के लिए सरकार ने 9 मार्च, 2026 को एक प्राकृतिक गैस नियंत्रण आदेश जारी किया है, ताकि महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। साथ ही, वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं और नए समुद्री मार्गों के माध्यम से गैस प्राप्त करने के प्रयास भी तेज कर दिए गए हैं।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड के सदस्य (वाणिज्यिक) ए.के. तिवारी ने स्पष्ट किया कि वर्तमान युद्ध की स्थिति ने देश को रणनीतिक भंडारण क्षमता बनाने का एक अवसर दिया है। सरकार विशेष रूप से उन एलएनजी टर्मिनलों पर अतिरिक्त स्टोरेज टैंक जोड़ने पर विचार कर रही है जहाँ विस्तार की गुंजाइश है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इन परियोजनाओं की व्यावसायिक व्यवहार्यता का परीक्षण करना अनिवार्य होगा, क्योंकि एलएनजी को पहले खरीदना, फिर स्टोर करना और बाद में बेचना एक जटिल आर्थिक प्रक्रिया है।

इस दिशा में सार्वजनिक-निजी भागीदारी या संयुक्त उद्यम मॉडल पर विचार किया जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि अक्टूबर 2025 में जारी एक मसौदा परिपत्र में, पेट्रोलियम मंत्रालय ने पहले ही एलएनजी टर्मिनल पंजीकरण नियमों में संशोधन का प्रस्ताव दिया था। इसके तहत ऑपरेटरों के लिए भंडारण क्षमता का एक विश्वसनीय प्लान रखना और आपूर्ति संकट या कीमतों में भारी उछाल के दौरान सरकार के उपयोग के लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त बफर स्टॉक बनाए रखना अनिवार्य करने का सुझाव दिया गया था।