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Share Market Crash Today 2026: क्यों गिरा आज शेयर बाजार? जानें वे 5 बड़े कारण जिनसे निवेशकों को लगा 10 लाख करोड़ का चूना

गुरुवार, 12 मार्च को बाजार खुलते ही ऐसा दबाव बना कि सेंसेक्स और निफ्टी दोनों औंधे मुंह गिर पड़े. आम निवेशक जो अपनी गाढ़ी कमाई बाजार में लगाकर मुनाफे की उम्मीद कर रहे थे, उनके पोर्टफोलियो को तगड़ा झटका लगा है. दिनभर के भारी उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स 829 अंक टूटकर 76,034 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 227 अंक फिसलकर 23,639 पर आ गया. मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी लगभग 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.

निवेशकों के 10 लाख करोड़ डूबे

इस तेज बिकवाली के कारण निवेशकों की संपत्ति में करीब 10 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई. गुरुवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 450 लाख करोड़ रुपये से घटकर करीब 440 लाख करोड़ रुपये रह गया. इस उठापटक के पीछे केवल एक वजह नहीं है, बल्कि दुनिया भर से आ रही कई नकारात्मक खबरों ने मिलकर भारतीय बाजार का मूड बुरी तरह बिगाड़ दिया है. आइए समझते हैं कि आखिर बाजार में इतनी घबराहट क्यों है और कौन से वो कारण हैं जिन्होंने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है.

कच्चे तेल के बढ़े दाम

बाजार को सबसे गहरा घाव कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने दिया है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड ऑयल लगभग 9 फीसदी की छलांग लगाकर एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है. होर्मुज स्ट्रेट में तेल ले जा रहे जहाजों पर ईरान के हमले की खबरों ने दुनियाभर में ऊर्जा सप्लाई चेन को लेकर गहरा संकट पैदा कर दिया है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने इतिहास में पहली बार बड़े पैमाने पर अपना आपातकालीन तेल भंडार खोलने का ऐलान किया, लेकिन इसका भी कीमतों पर कोई खास असर नहीं दिखा. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए महंगे क्रूड का सीधा मतलब है देश में महंगाई का बढ़ना.

विदेशी निवेशकों की भारी निकासी

दूसरी तरफ, विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भी बाजार से अपना हाथ खींच रहे हैं. मार्च के महीने में ही वे अब तक 39,100 करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी कर चुके हैं. लगातार नौवें दिन बिकवाली करते हुए उन्होंने 6,267 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. हालांकि घरेलू निवेशक (DII) बाजार को थामने की कोशिश जरूर कर रहे हैं, लेकिन विदेशी फंड्स की निकासी का दबाव बहुत ज्यादा है.

अमेरिका की ‘ट्रेड वॉर’ पॉलिसी का डर

ग्लोबल मार्केट से भी निवेशकों को राहत की कोई खबर नहीं मिल रही है. एशियाई बाजारों से लेकर अमेरिकी शेयर बाजार तक, हर जगह सुस्ती और लाल निशान का माहौल है. कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने की आशंका से पूरी दुनिया में महंगाई का डर फिर से सताने लगा है. इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त टैरिफ नीतियों ने चिंता को दोगुना कर दिया है.

अमेरिका ने भारत समेत 16 देशों के खिलाफ “अनफेयर ट्रेड” (अनुचित व्यापार) की नई जांच शुरू कर दी है. माना जा रहा है कि यह ट्रंप प्रशासन की आक्रामक व्यापारिक नीतियों की वापसी का संकेत है. इस कदम से अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बुरा असर पड़ने की आशंका है. ग्लोबल ट्रेड को लेकर बनी इसी अनिश्चितता के कारण निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है.

रुपये की ऐतिहासिक गिरावट

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा प्रहार हमारी मुद्रा पर पड़ा है. गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 30 पैसे की कमजोरी के साथ 92.34 के स्तर पर पहुंच गया, जो इसके ऑलटाइम लो (ऐतिहासिक निचले स्तर) के बेहद करीब है. कमजोर रुपया आम आदमी और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए चिंता का सबब है, क्योंकि इससे आयात बिल बढ़ता है और चालू खाते का घाटा बढ़ने का खतरा रहता है.

बाजार में डर किस हद तक है, इसका सटीक अंदाजा ‘इंडिया VIX’ इंडेक्स को देखकर लगाया जा सकता है. इसे शेयर बाजार का ‘डर का पैमाना’ कहा जाता है. गुरुवार को इसमें करीब 6 प्रतिशत का भारी उछाल आया और यह 22.32 के स्तर पर पहुंच गया.