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ट्रंप की धमकी के तुरंत बाद जी 7 देशों का नया फैसला

अपने भंडार से तेल और डीजल जारी करने की घोषणा

पेरिसः अंतरराष्ट्रीय बाजार में आसमान छूती कीमतों और आपूर्ति के बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने के लिए जी-7 देशों ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के इस समूह ने बाजार में स्थिरता लाने के उद्देश्य से कुल 100 मिलियन बैरल (दस करोड़ बैरल) कच्चा तेल और डीजल जारी करने पर सहमति व्यक्त की है। दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में तेजी से आ रही उछाल और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा डीजल निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की गंभीर चेतावनी के बाद यह वैश्विक समझौता सामने आया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिकी उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए अमेरिका से डीजल निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दी थी। उनका यह कदम भले ही घरेलू स्तर पर कीमतें कम करता, लेकिन इसके कारण अन्य देशों विशेषकर यूरोप में संकट और अधिक गहरा सकता था। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने भी तर्क दिया था कि बढ़ते दामों के बीच अमेरिकी किसानों, ट्रक चालकों और व्यवसायों को सारा बोझ उठाने के लिए अकेला नहीं छोड़ा जा सकता। डीजल का उपयोग परिवहन (हॉलेज) और कृषि क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किया जाता है, जिसके कारण इसके दाम बढ़ने से सीधे तौर पर भोजन जैसी आवश्यक वस्तुएं भी महंगी हो जाती हैं।

इस बढ़ते तनाव के बीच, जी-7 नेताओं की एक उच्च-स्तरीय बैठक हुई, जिसमें यह सामूहिक निर्णय लिया गया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन ने बैठक के बाद जानकारी दी कि इस समूह ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के समन्वय के तहत अगले चार महीनों के भीतर 100 मिलियन बैरल तक के सामरिक भंडार को बाजार में जारी करने का फैसला किया है। इस संयुक्त पहल में आने वाले दिनों में डीजल की एक पर्याप्त मात्रा को तुरंत जारी किया जाना भी शामिल है। जी-7 के संयुक्त बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि सदस्य देश अब एक-दूसरे के ऊर्जा उत्पादों पर किसी भी प्रकार के निर्यात प्रतिबंध लगाने से परहेज करेंगे।

ब्रिटेन का प्रतिनिधित्व करते हुए विदेश सचिव एड मिलिबैंड ने इस कदम का स्वागत किया और कहा कि यह उपाय ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर करने, आपूर्ति श्रृंखलाओं में लचीलापन बनाने और परिवारों तथा व्यवसायों को मूल्य के झटकों से बचाने में मदद करेगा। राष्ट्रपति मैक्रोन ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इस समन्वित कार्रवाई से विशेष रूप से डीजल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में गिरावट आएगी और राष्ट्रपति ट्रम्प भी इस बात को लेकर पूरी तरह स्पष्ट थे कि निर्यात प्रतिबंधों से बचना आवश्यक है। हालांकि, बाद में व्हाइट हाउस में बोलते हुए राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया कि डीजल पर निर्यात प्रतिबंध जैसी कोई बात वास्तव में कभी विचाराधीन ही नहीं थी।

जी-7 के इस बड़े फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तुरंत प्रतिक्रिया देखने को मिली। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत में कुछ समय के लिए गिरावट आई और यह 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे चला गया, हालांकि शुक्रवार शाम तक यह फिर से बढ़कर लगभग 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।

गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर आक्रमण किए जाने से पहले यह तेल लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। कमोडिटी रिसर्च फर्म केप्लर के निदेशक मैट स्मिथ के अनुसार, यूरोपीय देशों द्वारा रणनीतिक भंडार जारी करने की घोषणा के बाद कीमतें भले ही नीचे आ रही थीं, लेकिन सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच नए सिरे से हुए हमलों की खबरों के कारण तेल की कीमतें फिर से ऊपर चढ़ गईं।