कर्मचारी की मिलीभगत की जानकारी मिली
मोबाइल फोन खरीद की पुष्टि हुई
कुमारस्वामी का कर्मचारी है प्रसाद
प्रसारित वीडियो पूरी तरह फर्जी है
राष्ट्रीय खबर
बेंगलुरुः कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को निशाना बनाने वाले कथित स्टिंग वीडियो की बेंगलुरु पुलिस जांच में दिल्ली से मोबाइल फोन की खरीद एक प्रमुख सुराग बनकर उभरी है। मामले में गिरफ्तार एक आरोपी ने दावा किया है कि यह खरीदारी केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारास्वामी की सोशल मीडिया टीम के एक सदस्य के निर्देशों पर की गई थी।
दिल्ली में गिरफ्तार रितेश पांडे ने जांचकर्ताओं को कथित तौर पर बताया कि उसने विनोद शर्मा के साथ मिलकर दिल्ली के करोल बाग स्थित एक दुकान से प्रज्वल प्रसाद (जो कुमारास्वामी की सोशल मीडिया टीम में काम करता है) के कहने पर एक मोबाइल फोन खरीदा था। बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त सीमंत कुमार सिंह के अनुसार, दोनों व्यक्ति बाद में दिल्ली के कुशक रोड स्थित कुमारास्वामी के आवास पर गए और फोन प्रसाद को सौंप दिया।
पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि ये दावे पांडे के बयान पर आधारित हैं और इनकी पुष्टि की जा रही है। उन्होंने कहा, ये सभी बयान सत्यापन और आगे की जांच के अधीन हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रसाद और शर्मा से आगे की पूछताछ जांच के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी। पुलिस ने दोनों व्यक्तियों को नोटिस जारी किए हैं, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया है और रिपोर्ट के अनुसार वे फरार हैं।
जांचकर्ताओं को यह भी जानकारी मिली है कि उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया है।
आरोपी के बयान की पुष्टि के लिए जांचकर्ता सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी खुफिया जानकारी और प्रसाद व पांडे के बीच हुए वित्तीय लेनदेन की जांच कर रहे हैं। पुलिस ने कहा कि वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए इस्तेमाल किया गया मूल मोबाइल फोन बरामद कर जब्त कर लिया गया है और उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट का इंतजार है।
जांच में यह भी स्थापित हुआ है कि वीडियो को वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क, मास्क किए गए आईपी एड्रेस और स्पूफ किए गए फोन नंबरों का उपयोग करके गुमनाम खातों के माध्यम से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया गया था।
पुलिस 2023 में इसकी कथित रिकॉर्डिंग से लेकर सितंबर और अक्टूबर 2026 में ऑनलाइन प्रसार तक वीडियो के अधिकार की श्रृंखला का पुनर्निर्माण करने पर काम कर रही है। 29 अक्टूबर को जारी एक बयान में, बेंगलुरु पुलिस ने कहा कि वीडियो में दर्शाए गए यौन उत्पीड़न के आरोप मनगढ़ंत और जानबूझकर बनाई गई कहानी का हिस्सा प्रतीत होते हैं। यह वीडियो कथित तौर पर 2011 की एक घटना से संबंधित है। पुलिस का कहना है कि इसमें शामिल व्यक्तियों की पहचान कर उनसे पूछताछ की जा चुकी है और अब तक एकत्र किए गए साक्ष्य आरोपों की पुष्टि नहीं करते हैं।