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छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड: 26 मासूमों की जान लेने वालों पर बड़ा एक्शन! अब 2 और डॉक्टर गिरफ्तार, जेल पहुंचे कुल 13 आरोपी

मध्य प्रदेश में छिंदवाड़ा जिले के बहुचर्चित कोल्ड्रिफ कफ सिरप कांड में 26 बच्चों की मौत हुई. वहीं. छह महीने बाद जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो और डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है. विशेष जांच दल (एसआईटी) ने शनिवार को परासिया के दो शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अमन सिद्दीकी और डॉ. एस.एस. ठाकुर को हिरासत में लिया. इस गिरफ्तारी के बाद अब तक इस मामले में कुल 13 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें श्रीसन फार्मा का मालिक और अन्य आरोपी पहले से ही जेल में बंद हैं.

यह मामला उस समय सामने आया था जब परासिया क्षेत्र में जहरीली कफ सिरप कोल्ड्रिफ के सेवन से 26 मासूम बच्चों की मौत हो गई थी. सभी बच्चे तीन से चार वर्ष से कम उम्र के थे और उन्हें सामान्य सर्दी-जुकाम की शिकायत होने पर यह दवा दी गई थी. दवा लेने के बाद बच्चों की हालत अचानक बिगड़ने लगी. परिजनों ने बताया कि बच्चों की किडनी प्रभावित हो गई, पेशाब बंद हो गया और इलाज के दौरान एक-एक कर उनकी मौत हो गई. इस दर्दनाक घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था.

जांच के दौरान यह सामने आया कि चिकित्सकों द्वारा लिखी गई कफ सिरप में ऐसा हानिकारक केमिकल शामिल था, जो छोटे बच्चों के लिए प्रतिबंधित और बेहद खतरनाक माना जाता है. आरोप है कि डॉक्टरों ने इस दवा को लिखते समय आवश्यक सावधानी नहीं बरती. जांच में यह भी पाया गया कि कंपनी की ओर से कमीशन के लालच में यह दवा लिखी जा रही थी.

अब तक 11 लोगों हुए गिरफ्तार

इस मामले में परासिया के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी सहित कुल 11 आरोपी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं और पिछले करीब छह महीनों से जेल में बंद हैं. अब दो और डॉक्टरों की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच और तेज होने की संभावना जताई जा रही है. एसआईटी का कहना है कि मामले से जुड़े हर व्यक्ति की भूमिका की बारीकी से जांच की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

इधर लंबे समय से न्याय की मांग कर रहे पीड़ित परिवारों ने दो और डॉक्टरों की गिरफ्तारी के बाद कुछ हद तक राहत की सांस ली है. उनका कहना है कि मासूम बच्चों की मौत के जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो सके.

कोर्ट ने क्या कहा था?

मामले में 17 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने डॉ. प्रवीण सोनी, ज्योति सोनी, राजेश सोनी और सौरभ जैन की जमानत याचिका खारिज कर दी थी. अदालत ने इस मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया आरोपियों की भूमिका गंभीर प्रतीत होती है, इसलिए उन्हें जमानत देना उचित नहीं होगा. न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की थी कि इतने संवेदनशील मामले में यदि आरोपियों को राहत दी जाती है तो समाज में गलत संदेश जाएगा.

सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2023 में जारी फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन FDC संबंधी दिशा-निर्देशों का भी उल्लेख किया. इन नियमों के तहत कम उम्र के बच्चों को दी जाने वाली दवाओं के संयोजन और मात्रा को लेकर स्पष्ट प्रावधान हैं. अदालत ने पाया कि इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया और चार साल से कम उम्र के बच्चों को प्रतिबंधित कफ सिरप दी गई.

किडनी खराब होने से हुई थी मौत

जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि एक बच्चे की हालत बिगड़ने पर उसे नागपुर रेफर किया गया था, जहां डॉक्टरों ने उसकी किडनी में गंभीर समस्या पाई और दवा को बच्चों के लिए खतरनाक बताया था. इसके बावजूद दवा का उपयोग जारी रखा गया. फिलहाल एसआईटी पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना भी जताई जा रही है.